Thursday, February 26, 2026
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समाज एक मानवीय रचना है, जो समय के साथ विकसित होती है और संस्कृतियों के बीच होती है भिन्न

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समाज हमारे जीवन का आधार है, जो हमें सुरक्षा, पहचान, नैतिकता और विकास के लिए एक ढाँचा देता है, जहाँ हम एक-दूसरे से सीखते, सहयोग करते और सामूहिक प्रगति करते हैं । यह हमारे व्यक्तित्व को आकार देता है, सामाजिक मूल्यों (जैसे प्रेम, भाईचारा) को सिखाता है और हमें अपनी खुशियाँ-दुःख बांटने व जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।
वहीं समाज एक गतिशील और मानवीय रचना है, जो समय, भूगोल और संस्कृति के साथ बदलती है, साझा विश्वासों, रीति-रिवाजों और संस्थाओं पर आधारित होती है, जिससे हर समाज की अपनी पहचान बनती है । सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता ज़रूरी हैं, लेकिन वैश्वीकरण ने विचारों के आदान-प्रदान से उन्हें करीब ला दिया है, जो समाजशास्त्र के मूल सिद्धांतों को दर्शाता है कि कैसे समाज स्थिर ना होकर लगातार विकसित होते हैं, पहचान बनाते हैं और वैश्विक प्रभावों से बदलते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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