Thursday, February 26, 2026
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संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप, भारत मुक्ति मोर्चा सहित कई संगठनों ने डीएम बस्ती को सौंपा ज्ञापन

मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश

बस्ती। आरएसएस–बीजेपी पर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए भारत मुक्ति मोर्चा, वामसेफ, बहुजन क्रांति मोर्चा, राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ सहित कई सामाजिक संगठनों ने आज जिला अधिकारी बस्ती को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संगठनों ने जाति आधारित जनगणना, शांतिपूर्ण आयोजनों पर रोक और बहुजन समाज की आवाज दबाने के प्रयासों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि वामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा का संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन 26 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक ओडिशा के कटक स्थित बलियात्रा लोअर ग्राउंड में आयोजित किया जाना प्रस्तावित था। इस अधिवेशन में ओबीसी, अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक समाज के सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों पर विचार-विमर्श होना था। साथ ही जाति आधारित जनगणना जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा प्रस्तावित थी।

ज्ञापन में कहा गया कि इस अधिवेशन के लिए आयोजकों द्वारा समय रहते सभी आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों से विधिवत अनुमति ली गई थी। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी हजारों प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस अधिवेशन में भाग लेने के लिए पहले से रेल और हवाई टिकट बुक कर रखे थे। इसके बावजूद अंतिम समय में कथित तौर पर आरएसएस–बीजेपी से जुड़े लोगों के दबाव में आकर कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी गई।

संगठनों ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) एवं 19(1)(c) का खुला उल्लंघन बताया, जो नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने तथा संगठन बनाने का अधिकार देता है। ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से सम्मेलन, अधिवेशन और विचार-विमर्श करना प्रत्येक नागरिक और संगठन का मौलिक अधिकार है, जिसे किसी भी राजनीतिक या वैचारिक दबाव में छीना नहीं जा सकता।

भारत मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि जाति आधारित जनगणना की मांग बहुजन समाज को उसका संवैधानिक हक दिलाने से जुड़ी है, लेकिन मौजूदा सरकार और उससे जुड़े संगठन इस विषय पर चर्चा से बचना चाहते हैं। इसी कारण सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों को बार-बार बाधित किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है।

ज्ञापन सौंपते समय संगठनों ने राष्ट्रपति से मांग की कि ओडिशा के कटक में अधिवेशन की अनुमति रद्द किए जाने के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में आकर संविधानिक अधिकारों का हनन किया है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। भविष्य में किसी भी सामाजिक संगठन के शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक कार्यक्रम को रोकने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई।

संगठनों ने जिला अधिकारी बस्ती के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार को यह संदेश देने का प्रयास किया कि बहुजन समाज अपने अधिकारों को लेकर सजग है और किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। नेताओं ने कहा कि यदि संविधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई और जाति आधारित जनगणना सहित सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो देशभर में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं समर्थक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और समानता की मांग उठाई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ

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