मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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संविधान की शक्ति उसके शब्दों में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले नागरिकों की निष्ठा में निहित है। जैसा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कहा था, “संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों ना हो, यदि उसे चलाने वाले लोग बुरे होंगे, तो वह बुरा साबित होगा।” इसलिए यह हमारा नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है कि हम संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और इसकी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लें। संविधान की सुरक्षा ही वास्तव में राष्ट्र, समाज व आमजन की सुरक्षा है। संविधान ही हमें यह बताता है कि समूची व्यवस्था कैसे काम करेगी । इसके अंतर्गत चुनाव प्रणाली, सरकार का गठन व उसका निलंबन, शक्तियों का बंटवारा, अधिकारों की रक्षा इत्यादि जैसे गंभीर एवं जटिल मुद्दे आते हैं । संविधान का महत्त्व इसलिए भी है कि यह सरकारों को भी दिशा दिखाने का कार्य करता है ।
संविधान भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है, अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है और बंधुत्व को बढ़ावा देने का प्रयास करता है । संविधान की सुरक्षा का अर्थ केवल उसकी किताब को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उसमें लिखे शब्दों को जीवित रखना है। जब हम संविधान के आदर्शों का पालन करते हैं, तो हम वास्तव में एक सशक्त, समृद्ध और न्यायप्रिय भारत का निर्माण कर रहे होते हैं। जैसा कि संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है, “हम भारत के लोग” ही इस संविधान की शक्ति का स्रोत हैं और इसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

