लिंगयाडीह आंदोलन 63वें दिन भी जारी, सरकार की चुप्पी से भड़का जनआक्रोश
///सभी समाजों व संगठनों का आंदोलन को मिला खुला समर्थन///
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै छत्तीसगढ़ प्रभारी
बिलासपुर।
लिंगयाडीह क्षेत्र में अपनी जायज़ मांगों को लेकर चल रहा जन आंदोलन आज 63वें दिन में प्रवेश कर गया है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की ठोस पहल नहीं होने से आंदोलनकारियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लंबे समय से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न समाजों एवं समाजसेवी संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे आंदोलन और तेज़ होता नजर आ रहा है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे बीते दो महीनों से अधिक समय से लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन लगातार उनकी अनदेखी कर रहा है। सरकार की इस उदासीनता ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
स्थानीय नागरिकों एवं समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन केवल लिंगयाडीह क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनभावनाओं को नज़रअंदाज़ कर रही है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है।
समाजसेवी संगठनों ने सरकार से तत्काल आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करने और उनकी मांगों का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई, तो स्थिति और अधिक विकराल हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वहीं आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होगा। लगातार मिल रहे जनसमर्थन से आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ा है और आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की रणनीति बनाई जा रही है।
क्षेत्र में बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए यह साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि यदि सरकार ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया, तो लिंगयाडीह आंदोलन एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।


