राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के पास 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
मूकनायक न्यूज/दिलीप कुमार/सिरोही(राजस्थान)
नई दिल्ली : राजस्थान में पंचायतों के परिसीमन और पुनर्गठन को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को सही ठहराते हुए इससे जुड़ी सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्रामीणों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को सुनवाई के योग्य नहीं माना। यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के 14 नवंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें पूरे राज्य में पंचायत परिसीमन को वैध माना गया था। हाईकोर्ट ने सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने और इसके बाद 15 अप्रैल 2026 तक पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कुछ गांवों को दूर-दराज की ग्राम पंचायतों में शामिल कर दिया गया है, जहां तक पहुंचना भौगोलिक रूप से कठिन है और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। साथ ही दूरी से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राजस्थान में पंचायत परिसीमन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और तय समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव कराए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

