मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
संतकबीरनगर। जनपद के विकासखंड सेमरियावा अंतर्गत ग्राम पंचायत खमरिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहां कथित नकली प्रधान, सचिव एवं रोजगार सेवक की आपसी मिलीभगत से सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को लूट का जरिया बना दिया गया है।
मनरेगा के तहत रामजतन के खेत से कब्रिस्तान तक चक रोड पटाई कार्य में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। कार्यस्थल पर प्रतिदिन 70 मजदूरों की फर्जी हाजिरी केवल एक ही फोटो के सहारे लगाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जहां पुरुष की फोटो लगी है, वहां महिलाओं के नाम दर्ज हैं
और जहां महिलाओं के नाम लिखे हैं, वहां पुरुषों की हाजिरी दिखाई जा रही है यानी कागजों में मजदूर काम कर रहे हैं, जबकि हकीकत में ज़मीन पर सन्नाटा पसरा है।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों की सीधी सरपरस्ती में चल रहा है। जो खुद भ्रष्टाचार में डूबे हैं वही नियम-कानून और ईमानदारी का ज्ञान दूसरों को बांटते फिरते हैं।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत खमरिया में मनरेगा के तहत पूर्व में कराए गए कार्यों एवं फर्जी भुगतान को लेकर जिलाधिकारी संत कबीर नगर से शिकायत भी की जा चुकी है। बावजूद इसके, हालात जस के तस बने हुए हैं और भ्रष्टाचारियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
पूर्व में खबरें प्रकाशित होने के बाद मनरेगा उपायुक्त एवं मुख्य विकास अधिकारी द्वारा कार्रवाई भी की गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक सुधरने को तैयार नहीं हैं। सरकारी योजनाओं को लूट का साधन बनाकर खुलेआम सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।
इस संबंध में मनरेगा आयुक्त का कहना है कि “यदि मामला संज्ञान में आता है तो जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस बार सिर्फ आश्वासन तक सीमित रहेगा? या फिर ग्राम पंचायत खमरिया में वर्षों से जमे भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई कर मिसाल कायम करेगा?

