मूकनायक/ दुर्गेंद्र सम्राट ब्यूरो प्रभारी बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। जनपद बस्ती में पुलिस प्रशासन को कथित रूप से गुमराह कर झूठी सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कराए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस प्रकरण में पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बहुजन नायक अमरजीत आर्य ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह भारत मुक्ति मोर्चा संगठन से जुड़े हुए हैं और संगठन में सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ 30 दिसंबर 2025 को थाना कोतवाली बस्ती में झूठी और मनगढ़ंत सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया है जबकि उन्होंने ऐसा कोई कृत्य नहीं किया जिससे कानून व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचे।
अमरजीत आर्य का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस प्रशासन को गुमराह करते हुए यह आरोप लगाया गया कि 29 दिसंबर 2025 को उन्होंने जिला अधिकारी कार्यालय में मीडिया के माध्यम से भड़काऊ भाषण दिया। इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए प्रार्थी ने बताया कि 29 दिसंबर 2025 को वह पूरे दिन भारतीय स्टेट बैंक ग्राहक सेवा केंद्र रामपुर बस्ती में अपनी माता के साथ बैंकिंग कार्यों में व्यस्त थे। इस दौरान धन निकासी और ई-केवाईसी से संबंधित कार्य किए गए जिसका प्रमाण उनके पास उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उनके बयान की पुष्टि करती है।
प्रार्थी ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बीते लगभग एक महीने से वह अपने ग्राम सभा छितही नरसिंह में मतदाता सूची से संबंधित कार्यों में व्यस्त थे इस अवधि में उन्होंने न तो सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक पोस्ट डाली और न ही किसी प्रकार की ऐसी सामग्री साझा की जिससे समाज में वैमनस्य फैलने या कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हो। इसके बावजूद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाना उन्हें साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
अमरजीत आर्य ने आरोप लगाया कि नवीन दुबे नामक व्यक्ति द्वारा न केवल झूठी शिकायत दर्ज कराई गई बल्कि उनके और उनके परिवार के साथ जातिसूचक गालियों का भी प्रयोग किया गया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में नवीन दुबे द्वारा उनकी मां और बहनों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही नवीन दुबे और उसके कथित सहयोगियों द्वारा जान से मारने की धमकी भी दी गई जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में है।
प्रार्थी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें गंभीर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है और समाज में उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर उन्हें एक विशेष समुदाय का विरोधी दिखाने की कोशिश की जा रही है जिससे सामाजिक तनाव और अशांति फैल सकती है। उनका मानना है कि यह न केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान पर हमला है बल्कि जिले के सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरा है।
अमरजीत आर्य ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उनके विरुद्ध दर्ज किए गए कथित फर्जी मुकदमे की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि जांच अधिकारी को निर्देश दिया जाए कि झूठे आधार पर दर्ज मुकदमे से उनका नाम हटाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन को गुमराह करने, षड्यंत्र रचने, झूठी सूचना देने और जिले का माहौल खराब करने के आरोप में नवीन दुबे के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है।
प्रार्थी का कहना है कि यदि इस तरह की झूठी शिकायतों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी निर्दोष को फंसाने के लिए पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर सकता है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था और कानून के शासन के लिए बेहद खतरनाक प्रवृत्ति बताया।
फिलहाल यह मामला पुलिस प्रशासन के संज्ञान में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रार्थना पत्र के आधार पर तथ्यों की जांच कराए जाने की संभावना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई सामने लाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

