Thursday, February 26, 2026
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धर्मांतरण विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का सरकार को नोटिस, 4 सप्ताह में जवाब मांगा।

मूकनायक/एम एस गौतम*सिरोही/ राजस्थान।

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती देने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस सतीश चन्द्र शर्मा की खंडपीठ यह निर्देश जयपुर बाई.वी.एस यूथ बुद्धिस्ट साहरा फांऊडेशन की याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान एओआर मोहम्मद शहीद अनवर एडवोकेट मोहम्मद राईस फारुखी, एडवोकेट इफात फातिमा, एडवोकेट ने कहा कि धर्मांतरण विरोधी कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और मानकों से परे हैं। बिल को बनाते समय विधायिका ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम किया हैं। यह कानून संवैधानिक सीमाओं का भी उल्लंघन करता है। गौरतलब है कि राज्य में 29 अक्टूबर से धर्मांतरण विरोधी कानून के प्रावधान लागू हो गए हैं। राजस्थान विधानसभा ने 8 सितंबर को धर्मांतरण विरोधी बिल (राजस्थान । विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025) को पास किया था। राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद 29 अक्टूबर को इसकी अधिसूचना जारी हो गई। इसके बाद इस कानून के प्रावधान पूरे प्रदेश में लागू हो गए हैं। यह कानून एससी एसटी आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदाय को पूर्णतया प्रभावी करता हैं ।स्वामहिक धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं पर चलेगा बुलडोजरनए कानून में धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं पर बुलडोजर चलाने का भी प्रावधान है। गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाओं के भवनों को सील करने और तोड़ने का प्रावधान किया है। बुलडोजर वा एक्शन तभी होगा, जब उनमें नियमों का उल्लंघन हुआ हो या अतिक्रमण करके बनाई गई हों। हालांकि स्थानीय निकाय और प्रशासन जांच के बाद ही बुलडोजर चलाएंगे। यदि किसी जगह पर सामूहिक धर्म परिवर्तन होता है तो वहां उस संपत्ति को तोड़ा जा सकेगा जिस भवन में सामूहिक धर्म परिवर्तनम हुआ है, उसे प्रशासन जब्त करेगा। लव जिहाद मामलों में 20 साल की सजा का प्रावधान : लवजिहाद मामलों में 20 साल की सजा होगी। केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को भी रद्द करवाया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो प्रशासन की मंजूरी लेना जरूरी होगा। धर्मपरिवर्तन करने के लिए कम से कम 90 दिन पहले कलेक्टर या एडीएम को सूचना देनी होगी। यह भी घोषणापत्र देना होगा कि वह अपनी सहमतिसे धर्म परिवर्तन करना चाहता है।धर्म परिवर्तन कराने वाले धर्माचार्यको भी दो महीने पहले मजिस्ट्रेट केयहां नोटिस देना होगा। इसके बादधर्म परिवर्तन की सूचना कलेक्टर,एडीएम के दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी। 2 महीने में आपत्तियां मांगी जाएंगी। कोई आपत्ति आने पर उसकी सुनवाई और निपटारे के बाद ही धर्म परिवर्तन हो सकेगा। राजस्थान सरकार के लाये गये धर्म परिवर्तन कानून के खिलाफ याचिकाकर्ता एडवोकेट डॉ. नरेन्द्र बौद्ध के नेतृत्व में 5 जनवरी 2025 को रैली की गयी थी। और मार्च में ‌धर्म परिवर्तन कानून के विरोध में जयपुर में महारैली की जायेगी।

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