Thursday, February 26, 2026
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ओपन कैटेगरी कोई अलग कोटा नहीं, मेरिट से चयन ‘डबल बेनिफिट’ नहीं: सर्वोच्च न्यायालय ।

मूकनायक/दिलीप कुमार(डि के सिद्धार्थ),सिरोही,राजस्थान।

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण और ओपन/जनरल कैटेगरी को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण संवैधानिक सिद्धांत को स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा है कि ओपन कैटेगरी कोई अलग सामाजिक या जातिगत कोटा नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर सभी उम्मीदवारों के लिए खुला मंच है। यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो उसे ओपन कैटेगरी में शामिल करना “डबल बेनिफिट” नहीं माना जा सकता।

किस मामले में आया फैसला? यह फैसला Rajasthan High Court & Anr. vs Rajat Yadav & Ors. (2025 INSC 1503) मामले में सुनाया गया। विवाद राजस्थान हाईकोर्ट की Junior Judicial Assistants (JRA) और Clerk Grade-II भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था।मामले में सवाल यह था कि:क्या SC/ST/OBC/EWS वर्ग का कोई उम्मीदवार, जो बिना किसी रियायत के ओपन/जनरल कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, उसे ओपन कैटेगरी की सूची में शामिल किया जा सकता है या नहीं…..

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: ओपन/जनरल कैटेगरी कोई अलग कोटा नहीं है।यह किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षित नहीं, बल्कि सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से खुली मेरिट-आधारित सूची है।आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार भी ओपन मेरिट में आ सकता है।यदि कोई SC/ST/OBC/EWS उम्मीदवार बिना किसी छूट या रियायत के जनरल कट-ऑफ से ऊपर अंक प्राप्त करता है, तो उसे ओपन/जनरल कैटेगरी में ही शामिल किया जाना चाहिए।इसे ‘डबल बेनिफिट’ नहीं कहा जा सकता।अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में उम्मीदवार:किसी विशेष आरक्षण लाभ का उपयोग नहीं कर रहा होता।केवल अपनी वास्तविक योग्यता और अंक के आधार पर चयनित होता है।इसलिए इसे दोहरा लाभ मानना गलत है।

संविधान के अनुरूप फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय:अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार),अनुच्छेद 16 (रोजगार में समान अवसर) के अनुरूप है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले से आरक्षण की व्यवस्था कमजोर नहीं होती, बल्कि मेरिट और समान अवसर के सिद्धांत को मजबूत किया जाता है।

फैसले का महत्व: इस निर्णय से:सरकारी भर्तियों में मेरिट-आधारित चयन की पारदर्शिता बढ़ेगी।आरक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को जनरल मेरिट में उनका हक मिलेगा“ओपन सीट केवल जनरल वर्ग की होती है” जैसी गलत धारणा को कानूनी रूप से खारिज किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि आरक्षण और मेरिट एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जो उम्मीदवार बिना किसी रियायत के मेरिट के आधार पर चयनित होता है, वह केवल एक योग्य उम्मीदवार है — उसकी सामाजिक श्रेणी उसके अधिकार को सीमित नहीं कर सकती।

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