मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भारत एक ऐसा देश है, जो प्राचीन काल से ही ज्ञान, विज्ञान और आध्यात्मिक खोज का केंद्र रहा है, लेकिन आधुनिक भारत में अक्सर यह देखने को मिलता है कि लोग वैज्ञानिक आविष्कारों और तार्किक सोच की तुलना में चमत्कारों और अंधविश्वासों पर अधिक भरोसा करते हैं। जहां एक ओर देश के वैज्ञानिक चंद्रयान जैसे मिशनों से दुनिया को हैरान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक बड़ा वर्ग चमत्कारिक बाबाओं और अंधविश्वासी परंपराओं के पीछे भाग रहा है। यह प्रवृत्ति समाज व राष्ट्र की वैज्ञानिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है । इसरो के सफल मिशन और अन्य वैज्ञानिक उपलब्धियाँ भारत की वैज्ञानिक प्रगति का प्रमाण हैं, जो विज्ञान के चमत्कारों को दर्शाता है।
भारत एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (आस्था) का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक आविष्कार को प्राथमिकता देनी होगी। जब तक हम ‘चमत्कार’ की प्रतीक्षा करना छोड़ ‘आविष्कार’ की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे, तब तक पूर्ण विकास संभव नहीं है। विडंबना यह है कि लोग जिस मोबाइल पर चमत्कार के वीडियो देखते हैं, वह खुद ही विज्ञान का एक महान अविष्कार है। इसलिए समाज को यह समझना होगा कि सबसे बड़ा चमत्कार मानव मस्तिष्क और उसकी मेहनत से किया गया वैज्ञानिक आविष्कार ही है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

