मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सुख-दुःख का संबंध मुख्य रूप से मनुष्य के अच्छे या बुरे कर्मों से होता है, ना कि अमीरी-गरीबी से, क्योंकि सच्चे सुख का आधार मन की शांति और संतुष्टि है, जो नेक कामों से मिलती है, जबकि अमीर लोग भी तनावग्रस्त हो सकते हैं और गरीब भी संतोष भरी जिंदगी जी सकते हैं, यह सब मानसिक स्थिति और कर्मों पर निर्भर करता है । अमीर व्यक्ति महलों में भी दुखी हो सकता है, वहीं गरीब व्यक्ति झोपड़ी में भी सुखी रह सकता है, क्योंकि पैसा केवल साधन है, सुख नहीं, वास्तविक सुख नैतिक आचरण, नेक कर्मों और संतोष से प्राप्त होता है, जो हमें अमीरी-गरीबी की सीमाओं से दूर ले जाता है ।
इसलिए सुख और दुख हमारे कर्मों की प्रतिध्वनि हैं। अमीरी और गरीबी मात्र जीवन की बाहरी स्थितियाँ हैं, जो समय के साथ बदल सकती हैं। सच्चा सुख सदाचारी बनने, दूसरों की सहायता करने और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने में निहित है। जिसने अपने कर्मों को सुधार लिया, उसने सुख का मार्ग पा लिया, चाहे वह राजा हो या रंक।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

