मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में प्रभावशीलता आवाज़ की ऊँचाई से नहीं, बल्कि शब्दों की गहराई से आती है। हमें अपनी ऊर्जा शोर मचाने में नहीं, बल्कि अपने शब्दों को सशक्त और प्रभावी बनाने में लगानी चाहिए। चाहे वह व्यक्तिगत संबंध हों, पेशेवर जीवन हो या सामाजिक परिवर्तन हो, सच्चे और सार्थक संवाद ही स्थायी परिणाम देते हैं। जिस तरह फसल बाढ़ से नहीं, बल्कि बारिश से उगती है, उसी तरह मानवीय रिश्ते और समाज आक्रामक शोर से नहीं, बल्कि शब्दों की शांतिपूर्ण और रचनात्मक शक्ति से विकसित होते हैं।
इसलिए यह कहावत हमें आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करती है। हमें अपनी ऊर्जा आवाज की बजाय शब्दों को ऊँचा करने में लगानी चाहिए । जब हमारे शब्द सच्चे, प्रेमपूर्ण और शक्तिशाली होंगे, तो वे प्रकृति के फूलों की तरह खिलेंगे और हमारे आस-पास एक सकारात्मक बदलाव लाएंगे। यह एक शांत लेकिन अटूट शक्ति है जो दुनिया को बेहतर बनाती है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

