Thursday, February 26, 2026
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संतों के मानव समानता वाली सतनाम की शिक्षा को बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में कानून का स्वरूप दिया……..गोपाल ऋषिकर भारती

बिलासपुर। ग्राम बेहतराई में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध भरतरी लोक गायिका स्व. सुरुज बाई खांडे के निवास प्रांगण में 21 दिसंबर 2025 को गुरु घासीदास जयंती उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लखन खांडे, सोहारा बाई खांडे, आकांक्षा खांडे, उज्ज्वल खांडे एवं परिवारजनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल ऋषिकर भारती रहे। विशेष अतिथि साहित्यकार एवं कवि, पूर्व केंद्रीय जेल अधीक्षक राजेंद्र गायकवाड़ थे। अन्य अतिथियों में बिलासपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी महिलांग, छत्तीसगढ़ महिला क्रांति सेना की अध्यक्ष लता राठौर, मुंबई से पधारी समाजसेविका रामकुमारी साहू, पार्षद प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य समाजसेवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पूर्व भारतीय खाद्य निगम सदस्य अधिवक्ता बरनलाल करियारे ने किया।

कार्यक्रम की शुरुआत संत गुरु घासीदास एवं जैत खंभ की पूजा-अर्चना से हुई। इस अवसर पर पंथी दलों एवं लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

जयंती सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि गोपाल ऋषिकर भारती ने कहा कि संत गुरु घासीदास द्वारा प्रतिपादित “मनखे-मनखे एक समान” का सतनाम दर्शन सामाजिक समानता, मानव गरिमा और बंधुत्व का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि जातिभेद, छुआछूत, लिंगभेद और पाखंड के विरुद्ध संतों की मानवतावादी शिक्षाओं को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने भारतीय संविधान में कानून का स्वरूप देकर समाज को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की। संविधान ही आज मूलनिवासी एवं वंचित समाज के अधिकारों की सबसे बड़ी गारंटी है।

विशेष अतिथि राजेंद्र गायकवाड़ ने कहा कि गुरु घासीदास का सामाजिक सुधार आंदोलन छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचार राष्ट्रीय स्तर पर समानता और न्याय की चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने मूलनिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष का आह्वान किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता महिलांग ने शिक्षा और रोजगार आधारित संस्थानों की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि बहुजन समाज के लिए छात्रावास एवं पुस्तकालय स्थापना की दिशा में पहल की जा रही है। महिला क्रांति सेना की अध्यक्ष लता राठौर ने छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरूकता को आवश्यक बताया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजक लखन खांडे ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

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