मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव स्वभाव की एक मूलभूत विशेषता असंतोष है। लोगों की इच्छाएं असीमित होती हैं और जब वे पूरी नहीं होतीं, तो वे निराश हो जाते हैं। लोग अक्सर अपनी समस्याओं और दुखों के लिए भाग्य या ईश्वर को दोष देते हैं। यदि लोग भगवान की बनाई दुनिया, उसके नियम और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से दुखी या नाराज हो सकते हैं, तो यह स्पष्ट है कि वे कभी भी किसी इंसान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकते। हर व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण होता है और वह उसी के अनुसार दूसरों को आंकता है।
बाहरी दुनिया की राय बदलती रहती है। आज जो सही लगता है, कल वही गलत हो सकता है। ऐसे में यदि हम दूसरों की राय के अनुसार खुद को बदलते रहेंगे, तो हम कभी भी स्थिर और शांत नहीं रह पाएंगे। सच्चा सुख और शांति तब मिलती है, जब हमारा जमीर साफ होता है। जब हम अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हैं और नैतिक रूप से सही काम करते हैं, तो हमें किसी बाहरी मान्यता की आवश्यकता महसूस नहीं होती।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

