Thursday, February 26, 2026
Homeदेशरुपया कितना भी गिर जाए, परंतु इतना कभी नहीं गिर पाएगा, जितना...

रुपया कितना भी गिर जाए, परंतु इतना कभी नहीं गिर पाएगा, जितना रुपये के लिए गिर चुका है इंसान

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
समाज में ऐसे अनगिनत उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहाँ पैसे के लिए व्यक्ति ने अपनी आत्मा तक का सौदा कर लिया है। भ्रष्टाचार का बोलबाला हर स्तर पर है, एक छोटा कर्मचारी घूस लेता है, एक बड़ा अधिकारी करोड़ों का घोटाला करता है और एक नेता देश के संसाधनों को लूटने से बाज नहीं आता। इन सभी कार्यों के मूल में धन का लालच ही तो है।
रिश्तों में भी यह गिरावट साफ झलकती है। भाई भाई का दुश्मन बन जाता है, दोस्त धोखा देते हैं और कभी-कभी तो पारिवारिक रिश्ते भी संपत्ति के विवाद में तार-तार हो जाते हैं। मानवीय भावनाएँ और संबंध कागजी नोटों के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। अस्पताल में इलाज के नाम पर होने वाली लूट, शिक्षा के क्षेत्र में व्यापत बाजारीकरण और न्याय प्रणाली में पैसे का प्रभाव, ये सब इस बात के प्रमाण हैं कि इंसान रुपये के लिए किस हद तक ‘गिर’ चुका है।
रुपया जीवन का लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जीवन को सुगम बनाना है, ना कि मानवीय गरिमा को कुचलना। रुपये का आर्थिक मूल्य भले ही कम हो जाए, लेकिन यदि इंसानियत का मूल्य बना रहे, तो समाज टिका रहता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम भौतिक संपत्ति के पीछे भागने के बजाय नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता दें। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि असली दौलत चरित्र, ईमानदारी और अच्छे कर्म हैं। रुपया केवल कागज का एक टुकड़ा है, लेकिन इंसान की गरिमा अमूल्य है। जब तक इंसान इस मूलभूत सत्य को नहीं समझता, रुपये के मुकाबले इंसान का नैतिक पतन जारी रहेगा।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments