Thursday, February 26, 2026
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मनुष्य की महानता उसके बैंक बैलेंस, जाति या पदवी में नहीं, बल्कि दिल में बसे मानवीय मूल्यों, विचारों की शुद्धता और नेक कर्मों में होती है निहित✍️✍️प्राचीन काल से ही मनुष्य की पहचान को लेकर समाज में बहस होती रही है। कुछ लोग जन्म, वंश और जाति को महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि वास्तव में, किसी व्यक्ति का असली मूल्य उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों, विचारों और व्यवहार से आँका जाता है। यह सिद्धांत मानवता की नींव है और एक सभ्य समाज का आधार है। सभी धर्मों, जातियों और सीमाओं से ऊपर उठकर मनुष्यों के प्रति प्रेम, दया, सहानुभूति और समानता का भाव रखना ही सबसे बड़ा कर्तव्य और सच्चा धर्म है।मनुष्य की असली महानता उसके बैंक बैलेंस, जाति या पदवी में नहीं, बल्कि उसके दिल में बसे मानवीय मूल्यों, उसके विचारों की शुद्धता और उसके नेक कर्मों में निहित होती है। पहले के जमाने में लोग दुःख में एक साथ खड़े रहते थे, चाहे कितनी भी लड़ाई क्यों ना हो जाए, जो उनकी सच्ची मानवता की भावना को दर्शाता है। जब हम अपने व्यवहार और कर्मों को श्रेष्ठ बनाते हैं, तभी हम ना केवल खुद को, बल्कि पूरे समाज को गौरवान्वित करते हैं और सच्चे अर्थों में महान बनते हैं।बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल

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