Thursday, February 26, 2026
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भारत का संविधानभाग 3 : मूल अधिकार*

अनुच्छेद 23 : मानव तस्करी और बलात् श्रम का प्रतिषेध

अनुच्छेद 23 – संविधान का मूल पाठ (हिंदी)

  1. मानव तस्करी और बलात् श्रम का प्रतिषेध—
    (1) मानव तस्करी, बेगार और इसी प्रकार के अन्य बलात् श्रम का निषेध किया जाता है और इस उपबंध का उल्लंघन दंडनीय अपराध होगा।

(2) इस अनुच्छेद में कोई बात राज्य को लोक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य सेवा अधिरोपित करने से नहीं रोकेगी, और ऐसी सेवा अधिरोपित करने में राज्य धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग या उनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।

📜 Article 23 – Original Text (English)

  1. Prohibition of traffic in human beings and forced labour—

(1) Traffic in human beings and begar and other similar forms of forced labour are prohibited and any contravention of this provision shall be an offence punishable in accordance with law.

(2) Nothing in this article shall prevent the State from imposing compulsory service for public purposes, and in imposing such service the State shall not make any discrimination on grounds only of religion, race, caste or class or any of them.

अनुच्छेद 23 क्या कहता है?

किसी भी व्यक्ति से जबरदस्ती काम कराना, बिना मजदूरी या दबाव में काम करवाना अपराध है।

इंसानों की खरीद-फरोख्त (मानव तस्करी) पूरी तरह प्रतिबंधित है।

बेगार (बिना पैसे के मजबूरी में काम कराना) संविधान के विरुद्ध है।

सरकार जनहित (जैसे आपदा, सेना, चुनाव, आपात स्थिति) में सेवा ले सकती है,
लेकिन उसमें धर्म, जाति, वर्ग या नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा।

संवैधानिक व्याख्या

  1. मानव तस्करी (Human Trafficking)

किसी व्यक्ति को बेचना, खरीदना, ले जाना, बंधक बनाना या शोषण के लिए इस्तेमाल करना मानव तस्करी है।

उदाहरण:

बच्चों को मजदूरी, भीख, यौन शोषण के लिए ले जाना

महिलाओं को नौकरी के नाम पर फँसाना
यह सीधा मौलिक अधिकार का उल्लंघन और गंभीर अपराध है।

  1. बेगार और बलात् श्रम (Forced Labour)

बिना वेतन या बहुत कम वेतन पर मजबूरी में काम कराना बेगार है।

दबाव हो सकता है:

कर्ज का
डर का
सामाजिक मजबूरी का

उदाहरण:

गरीब मजदूर से दिन-रात काम कराना
मजदूरी न देना या रोक लेना

महत्वपूर्ण निर्णय

👉 पीयूडीआर बनाम भारत संघ (1982)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा:

“न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान भी बलात् श्रम माना जाएगा।”

  1. राज्य द्वारा अनिवार्य सेवा (Compulsory Service)

संविधान यह भी कहता है कि:

सरकार जनहित में सेवा ले सकती है, जैसे:
आपदा प्रबंधन
चुनाव ड्यूटी
सेना/सिविल डिफेंस

लेकिन:

कोई जाति, धर्म या वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया जा सकता।

अनुच्छेद 23 का लोकतांत्रिक महत्व

यह अनुच्छेद मानव गरिमा की रक्षा करता है
यह गरीब, मजदूर, अनुसूचित जाति/जनजाति , आदिवासी, महिला और बच्चों की ढाल है।

यह बताता है कि:

“भारत में कोई भी व्यक्ति गुलाम नहीं है”

यदि अनुच्छेद 23 का उल्लंघन हो तो क्या करें?

पुलिस में शिकायत
जिला प्रशासन / श्रम विभाग
मानवाधिकार आयोग
RTI के माध्यम से जवाबदेही
न्यायालय में रिट याचिका (अनुच्छेद 32 / 226)

✍️ संवैधानिक संदेश (रवि शेखर भारतीय की ओर से)

“अनुच्छेद 23 केवल कानून नहीं,

यह भारत की शक्ति है —
जहाँ श्रम का सम्मान है,
और शोषण अपराध है।”
🇮🇳🇮🇳🇮🇳

जय संविधान 🇮🇳 | जय लोकतंत्र

संविधान ही जीवन है.इसे अपनाएं और अमल में लाएं.सभी नागरिक भारत का संविधान पढ़ें.दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें. जय संविधान 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

रवि शेखर
मंडल प्रभारी / रिपोर्टर
मूकनायक
मेरठ मंडल मेरठ उत्तर प्रदेश भारत

राष्ट्रीय अध्यक्ष
डॉक्टर बी आर अंबेडकर जनकल्याण विकास जागरण मंच तहसील मवाना जिला मेरठ उत्तर प्रदेश भारत 250 401

9675795931
7466901586
Email- ravisshekhar63@gmail.com

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