Thursday, February 26, 2026
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भारतीय समाज की पारंपरिक पहचान ‘संयुक्त परिवार’ रही है, परंतु आधुनिक परिवेश और मोबाइल जैसी तकनीक ने इस सुदृढ़ ढांचे को रख दिया है हिलाकर

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आधुनिक परिवेश, शहरीकरण और तकनीकी विकास (जैसे टेलीफोन/इंटरनेट) ने संयुक्त परिवारों को एकल परिवारों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है, जहाँ करियर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्थान की कमी मुख्य कारण हैं, जिससे परिवार टूट रहे हैं । हालाँकि, ये तकनीकें दूर बैठे परिवार को जोड़े रखने का ज़रिया भी बनी हैं, परंतु साथ ही मोबाइल के अधिक उपयोग ने एक-दूसरे के साथ बिताए समय को कम कर दिया है, जिससे भावनात्मक दूरी बढ़ रही है और संयुक्त परिवार की पारंपरिक एकजुटता बिखर रही है, जिसे फिर से जोड़ने की आवश्यकता है।
आधुनिकता और तकनीक ने जीवन को आसान अवश्य बनाया है, लेकिन संयुक्त परिवार जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक इकाई को कमजोर किया है । हमें तकनीक का उपयोग समझदारी से करना होगा । हमें अपने रिश्तों और परिवार को प्राथमिकता देनी होगी, ताकि आधुनिक परिवेश की चुनौतियों के बीच भी हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचा सकें और एक-दूसरे के साथ जुड़कर एक मजबूत समाज का निर्माण कर सकें । संयुक्त परिवार आज भी भारतीय समाज के लिए ज़रूरी है, बशर्ते उसमें सम्मान और समझ बनी रहे।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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