Thursday, February 26, 2026
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भामाशाहों द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा में जर्सी वितरण कार्यक्रम का किया आयोजन

मूकनायक राजस्थान बूंदी

संवाददाता विष्णु प्रसाद बैरवा

बूंदी – राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दौलतपुरा में दिनांक 08 दिसंबर 2025 को भामाशाह श्रीमती ममता सक्सेना द्वारा कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए 56 गर्म जर्सियों का वितरण किया गया। इस सेवा कार्य की अनुमानित लागत लगभग ₹20,000 बताई गई।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कृष्णा गुप्ता ने भामाशाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की सहायता विद्यार्थियों को सर्दी के मौसम में राहत प्रदान करती है एवं अध्ययन के प्रति उनका उत्साह बढ़ाती है।इस अवसर पर विद्यालय स्टाफ सदस्य बनवारी लाल डूडी, दीपशिखा शर्मा, सीताराम गुर्जर, महेश मीणा, दौलतराम मीणा, गोपाल महावर, यादवेन्दु शर्मा, उमा शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, रामस्वरूप मीणा, संतोष कुमार एवं टिंकू मीणा उपस्थित रहे। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) एवं विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति (एसडीएमसी) के सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए।कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शिक्षक अमर सिंह बैरवा ने बताया कि भामाशाह ममता सक्सेना द्वारा पूर्व में भी विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए ड्रेस व जर्सी वितरण किया जा चुका है। विद्यालय परिवार ने उनके इस निरंतर सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

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मनुष्य की महानता उसके बैंक बैलेंस, जाति या पदवी में नहीं, बल्कि दिल में बसे मानवीय मूल्यों, विचारों की शुद्धता और नेक कर्मों में होती है निहित✍️✍️प्राचीन काल से ही मनुष्य की पहचान को लेकर समाज में बहस होती रही है। कुछ लोग जन्म, वंश और जाति को महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि वास्तव में, किसी व्यक्ति का असली मूल्य उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों, विचारों और व्यवहार से आँका जाता है। यह सिद्धांत मानवता की नींव है और एक सभ्य समाज का आधार है। सभी धर्मों, जातियों और सीमाओं से ऊपर उठकर मनुष्यों के प्रति प्रेम, दया, सहानुभूति और समानता का भाव रखना ही सबसे बड़ा कर्तव्य और सच्चा धर्म है।मनुष्य की असली महानता उसके बैंक बैलेंस, जाति या पदवी में नहीं, बल्कि उसके दिल में बसे मानवीय मूल्यों, उसके विचारों की शुद्धता और उसके नेक कर्मों में निहित होती है। पहले के जमाने में लोग दुःख में एक साथ खड़े रहते थे, चाहे कितनी भी लड़ाई क्यों ना हो जाए, जो उनकी सच्ची मानवता की भावना को दर्शाता है। जब हम अपने व्यवहार और कर्मों को श्रेष्ठ बनाते हैं, तभी हम ना केवल खुद को, बल्कि पूरे समाज को गौरवान्वित करते हैं और सच्चे अर्थों में महान बनते हैं।बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
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