मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पारिवारिक रिश्ते विश्वास और भरोसे की नींव पर टिके होते हैं, और जब यह नींव धोखे व विश्वासघात से हिल जाती है, तो पूरा ढांचा चरमरा जाता है। पारिवारिक रिश्ते अक्सर छोटी-मोटी नोकझोंक झेल सकते हैं, जो कि सामान्य हैं, लेकिन जब विश्वासघात और धोखे की भावना घर कर जाती है, तो वे रिश्ते भीतर से खोखले और कमजोर हो जाते हैं। इसके प्रभाव केवल कुछ समय के लिए नहीं होते, बल्कि लंबे समय तक चल सकते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच दरार आ जाती है जो कभी-कभी ठीक नहीं हो पाती।
परिवार में धोखा सबसे पहले भरोसे को तोड़ता है। यह वही विश्वास है जिसमें अपने लोग कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, परंतु एक बार टूट जाने पर, इस भरोसे को वापस बनाना लगभग असंभव हो जाता है। धोखे से भावनात्मक आघात लगता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति अक्सर अकेला और असहाय महसूस करता है। हालांकि छोटी-मोटी असहमति परिवार का हिस्सा है, विश्वासघात एक ऐसा जहर है जो प्यार और एकता के बंधन को मिटा देता है और परिवार के सदस्यों के बीच की दूरी को हमेशा के लिए बढ़ा देता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

