मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
परिवार मोतियों की माला के समान होता है, जहाँ हर सदस्य एक मोती है और यदि एक मोती टूटकर अलग हो जाए तो पूरी माला बिखर जाती है क्योंकि परिवार के हर सदस्य का एक-दूसरे से गहरा जुड़ाव होता है और एक की अनुपस्थिति पूरे परिवार की चमक और संतुलन को प्रभावित करती है। परिवार का मुखिया या घर के संस्कार उस ‘धागे’ की तरह होते हैं, जो सबको बांधकर रखते हैं। अगर यह अनुशासन या प्रेम का धागा कमजोर पड़़ जाए तो परिवार बिखरने लगता है।
मोतियों की माला अगर एक बार टूट जाए, तो उसे दोबारा पिरोना बहुत कठिन होता है और गांठें पड़़ जाती हैं। ठीक वैसे ही, रिश्तों में आई दरार को भरना मुश्किल होता है। इसलिए हमें अपने परिवाररूपी माला को सहेजकर रखना चाहिए। छोटी-मोटी गलतफहमियों को भुलाकर रिश्तों की डोर को मजबूत बनाए रखना ही समझदारी है, ताकि यह अनमोल माला कभी बिखरने ना पाए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

