Thursday, February 26, 2026
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जिला जेल कांकेर में विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मृत्यु, परिजनों और सर्व आदिवासी समाज ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

बसंत प्रधान की रिपोर्ट –

कांकेर।जिला जेल कांकेर में विचाराधीन कैदी जीवन ठाकुर (आयु 49 वर्ष), निवासी ग्राम मयाना, थाना चारामा की कथित संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों ने मृतक की मृत्यु को लेकर गंभीर लापरवाही और सूचना छुपाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन को विस्तृत आवेदन सौंपा है। वहीं सर्व आदिवासी समाज, जिला ईस्ट कांकेर ने भी इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

परिजनों ने आवेदन में उल्लेख किया है कि—

जीवन ठाकुर को 2 दिसंबर 2025 को जिला जेल में निरुद्ध किया गया था।

जेल प्रशासन द्वारा बीमारी या किसी भी चिकित्सकीय समस्या की जानकारी परिवार को नहीं दी गई।

4 दिसंबर की सुबह 4:20 बजे उन्हें स्वास्थ्य ठीक न होने पर अस्पताल भेजा गया, परिजनों को इसकी भी तत्काल सूचना नहीं दी गई।

उसी दिन सुबह 7:45 बजे उनकी मृत्यु हो गई, जबकि परिजनों को मौत की जानकारी शाम 5 बजे दी गई।

परिवार ने मांग की है कि मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कराई जाए, पोस्टमार्टम रिपोर्ट साझा की जाए तथा शव परिवार को सौंपा जाए ताकि परिवार अंतिम संस्कार की विधि सम्मान पूर्वक कर सके।

सर्व आदिवासी समाज ने भी सौंपा ज्ञापन-

सर्व आदिवासी समाज ने एसपी कांकेर को दिए ज्ञापन में कहा कि—
विचाराधीन कैदी की मृत्यु को लेकर जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही एवं सूचना छुपाने की आशंका है।

घटना की न्यायिक जांच कर दोषी अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जाए।

समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं होती तो वे चरणबद्ध आंदोलन पर उतरेंगे।
मांगें-
परिवार व समाज की मुख्य मांगें—

  1. मृत्यु की निष्पक्ष जांच व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
  2. पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिवार को उपलब्ध कराना।
  3. शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लायक सुपुर्दगी।
  4. जेल प्रशासन द्वारा सूचना छुपाने की जांच।

प्रशासन ने की पुष्टि

परिजनों द्वारा दिए गए दस्तावेज़ में एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिनमें आरोपी की मौत और सूचना की देरी का उल्लेख शामिल है।

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