Thursday, February 26, 2026
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गुरु घासीदास जयंती पर संविधान सुरक्षा सत्संग आयोजित, सामाजिक समरसता और संवैधानिक चेतना पर दिया गया बल

बालको नगर।राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के घटक संगठन मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा एवं सिद्धार्थ लोक कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में 18 दिसंबर 2025 को बालको नगर कार्यालय प्रांगण में छत्तीसगढ़ के महान संत गुरु घासीदास की पावन जयंती “संविधान सुरक्षा सत्संग” के रूप में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष गोपाल ऋषिकर भारती ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरु घासीदास, तथागत बुद्ध और बाबा साहब अंबेडकर के छायाचित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात उपस्थितजनों को चाय-नाश्ता एवं मिठाइयां वितरित की गईं।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता गोपाल ऋषिकर भारती ने गुरु घासीदास की जयंती पर छत्तीसगढ़ सहित समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास ने सतनाम दर्शन के माध्यम से जातिभेद, छुआछूत, लिंगभेद और पाखंड के विरुद्ध सामाजिक चेतना की मजबूत नींव रखी। “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश आज भी सामाजिक समानता, मानव गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों, दर्शनों और मानवीय मूल्यों का समावेशी दस्तावेज है, जो समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करता है। धर्म के नाम पर अंधविश्वास, हिंसा और सामाजिक विभाजन फैलाने वाली प्रवृत्तियां लोकतंत्र के लिए घातक हैं, जिनसे संवैधानिक जागरूकता और कानून के माध्यम से ही निपटा जा सकता है।

कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक संविधान में निहित मूल्यों की समझ पहुंचाई जाएगी और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संगठित, शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक प्रयास किए जाएंगे।

कार्यक्रम को केंद्रीय प्रतिनिधि निरंजन प्रधान, जिला संयोजक क्रांति कुमार साव, जिला उपाध्यक्ष प्यारेदास महंत, संभागीय अध्यक्ष वासुदेव साहू, संभागीय संगठन सचिव निर्मल कसार, बालको महिला अध्यक्ष गायत्री साहू, महासचिव शीतला साहू, जिला सचिव बलजीत कौर, कोषाध्यक्ष संगीत साहू, संभागीय महिला सचिव सूरज मन्नेवार, जिला उपाध्यक्ष उमेदा साहू, रूपनारायण कंवर, सरसती सारथी, दीपिका यादव, शांति गुप्ता, सरिता सूर्यवंशी, आशा डोंगरे तथा रामबाई मानिकपुरी ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। सभी उपस्थितजनों ने गुरु घासीदास के जीवन, संघर्ष और विचारों से प्रेरणा लेकर भारत के संविधान के मार्ग पर चलने तथा सामाजिक समानता और आपसी सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।

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