मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
वास्तव में गलतियाँ जीवन का हिस्सा है। सभी से कभी ना कभी छोटी या बड़ी गलती जरूर होती है। इसीलिए हमें चाहिए कि अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर उन्हें दोबारा ना दोहराया जाये। साथ ही जानबूझकर गलती ना करें क्योंकि यह गलती ना होकर साजिश कहलाती है। इसके बाद यदि खुद से या किसी अन्य से गलती हो जाती है तो बेकार गुस्सा या आत्मग्लानी करने के बजाय उसे सही करने का प्रयास करें तथा उससे होने वाले नुकसान को कम करने का प्रयास करें, ना कि हड़बडी में हालत को और खराब कर दें।
गलतियाँ मानव अनुभव का एक अनिवार्य हिस्सा हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से दिमाग को भ्रम में डालती हैं। संज्ञानात्मक विसंगति से लेकर भविष्य के निर्णयों में पूर्वाग्रह तक, गलतियाँ हमारे सोचने और महसूस करने के तरीके को नया रूप देती हैं। हालांकि, इन भ्रमों को समझना ही इनसे बाहर निकलने का पहला कदम है। गलतियाँ स्थायी असफलता नहीं हैं, बल्कि सीखने के अवसर हैं। इन अनुभवों से तर्कसंगत तरीके से सीखकर और दिमाग द्वारा पैदा किए गए भ्रम के जाल को पहचानकर ही एक व्यक्ति स्पष्टता की ओर बढ़ सकता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

