मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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एक सुखद और मधुर जीवन के लिए दिमाग में शांति, होठों पर मुस्कुराहट और हृदय में कोमलता जरूरी है। क्षमता होते हुए भी अगर हम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, तो इसका मतलब हममें हिम्मत नहीं है। कोई भी लक्ष्य मनुष्य की हिम्मत से बड़ा नहीं होता। हारा वही है, जो लड़ने के लिए खड़ा नहीं होता। खोए की चिंता मत कीजिए और जो अभी नहीं हुआ है, उसके बारे में सोच- सोचकर दिमाग को बोझिल मत बनाइए । जो चोंच देता है, वह चुग्गा भी देता है, यह सोचकर सहजता से जिएँ और मस्त रहें।
आगे बढ़ने के लिए जोश चाहिए और जीवन जीने के लिए होश चाहिए। जोश नया इतिहास बनाएगा और होश हमें आत्म विजेता । जीवन के रंगमंच पर आगे बढ़ने के लिए ‘जोश’ नायक है, जो कार्रवाई करता है और ‘होश’ निर्देशक है जो कहानी को सही मोड़ देता है। हमें अपने सपनों का पीछा करने के लिए उत्साह की ज़रूरत है लेकिन उन सपनों को नैतिक और टिकाऊ तरीके से जीने के लिए समझदारी की भी ज़रूरत है। इसलिए यह कथन पूर्णतया सत्य है कि “आगे बढ़ने के लिए जोश चाहिए और जीवन जीने के लिए होश चाहिए।” इन दोनों को संतुलित करके ही हम एक गतिशील, सफल और संतुष्टिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

