Thursday, February 26, 2026
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कानून का सिद्धांत समानता का है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अक्सर एक ‘दोहरी कानूनी व्यवस्था’ दिखती है, जहाँ अमीर अपने संसाधनों के बल पर और गरीब अपनी लाचारी के कारण अलग-अलग करते हैं अनुभव

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े बड़े अपराधी, राजनेता या प्रभावशाली लोग अपने बचाव में कानूनी प्रक्रिया में हेरफेर करके अच्छे वकीलों, पैसों और अपने संपर्कों के इस्तेमाल से बच निकलते हैं, जबकि आम आदमी के लिए कानून की प्रक्रिया जटिल और महंगी होती है । कई बार ऐसा देखा जाता है कि कानून का पालन कराने वाली संस्थाओं की कार्रवाई छोटे अपराधों या मामूली उल्लंघनों के लिए गरीब और कमजोर लोगों पर अधिक सख्ती से लागू होती है। रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, दिहाड़ी मजदूर या छोटे मोटे अपराधों में शामिल व्यक्ति अक्सर त्वरित कानूनी कार्रवाई का सामना करते हैं। जमानत या कानूनी प्रक्रिया के खर्चों को वहन करने में असमर्थता के कारण उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है, भले ही उनके अपराध गंभीर ना हों। यह स्थिति दर्शाती है कि कानून की “लंबी पहुँच” कभी-कभी कमजोरों के लिए अधिक आसानी से और कठोरता से महसूस होती है।
भ्रष्टाचार या पक्षपात भी इस स्थिति को जन्म देता है। कुछ अधिकारी और संस्थान कमजोर वर्ग की बजाय ताकतवर लोगों का ही साथ देते हैं, जिससे न्याय कमजोर पड़ जाता है। इसलिए एक न्यायपूर्ण समाज के लिए यह आवश्यक है कि कानून की पहुँच सभी के लिए समान और निष्पक्ष हो। न्याय व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धन या सामाजिक स्थिति किसी व्यक्ति को कानूनी परिणामों से बचा ना सके और ना ही कमजोरों को अनावश्यक रूप से दंडित किया जाए। कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों की सुरक्षा करना और उन्हें न्याय प्रदान करना है, चाहे उनकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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