मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
इंसानियत एक ऐसी भावना है, जो हमें दूसरों के प्रति दयालु, करुणालु और मददगार बनने के लिए प्रेरित करती है। यह हमें दूसरों की पीड़ा को महसूस करने और उनकी मदद करने के लिए प्रेरित करती है, भले ही वे हमारे करीबी ना हों। दूसरों के प्रति दयालु और करुणालु का व्यवहार करना एक इंसानियत है, परंतु आज के परिवर्तनशील माहौल में इंसान सहानुभूति और करुणा की बजाय स्वार्थ, असंयम, लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार, संस्कारों की कमी और सामाजिक असमानता जैसे कई कारणों से अपनी इंसानियत भूल जाता है।
आज हर आदमी पैसे कमाने की अंधी दौड़ में लगा हुआ है, उसके लिए चाहे रिश्वत लेनी पड़े या कालाबाजारी ही करनी पड़े, लेकिन व्यक्ति किसी से नहीं चूकता । कुछ लोगों का इंसानियत भूल जाना एक जटिल मुद्दा भी है, जो व्यक्तिगत नैतिकता, सामाजिक दबावों और मनोवैज्ञानिक आघातों के मिश्रण से उत्पन्न होता है। यह अक्सर मानवीय मूल्यों से अधिक जीवित रहने, शक्ति या व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देने का परिणाम है। समाज के रूप में, हमें सहानुभूति, करुणा और नैतिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने वाले वातावरण बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि लोगों को ऐसी गिरावट से बचाया जा सके।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

