मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जब तक शिष्टाचार की सरस्वती प्रवाहित नहीं होगी, तब तक मानव समाज मानव होने के गौरव से वंचित ही रहेगा, यह बताता है कि शिष्टाचार ही वह नींव है, जिस पर एक सभ्य और सम्मानित समाज का निर्माण होता है। बिना शिष्टाचार के, मनुष्य के व्यवहार में नम्रता, सम्मान और सहयोग का अभाव होता है और वह सच्चे मानव होने का गौरव प्राप्त नहीं कर सकता। शिष्टाचार, विनम्रता, सद्भावना, सम्मान और अनुशासन जैसे मूल्यों पर आधारित एक नैतिक मापदंड है।
शिष्टाचार लोगों को एक-दूसरे के प्रति दयालु और विचारशील व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे आपसी सद्भाव और सामंजस्य बढ़ता है । शिष्टाचार के बिना, समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना कम हो जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि लोग एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करें, जो एक सुखी और स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है। जब लोग शिष्टाचार और सम्मानजनक तरीके से व्यवहार करते हैं, तो वे ना केवल स्वयं को बल्कि पूरे समाज को गौरवान्वित करते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

