Thursday, February 26, 2026
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“महिलाओं के मुक्तिदाता, भारत के भाग्य विधाता को नमन — संविधान दिवस पर महरौनी में जागी जनजागृति की लौ”,

रविदास धर्मशालाओं में गूंजा प्रस्तावना का स्वर: आंबेडकर के संघर्ष, महिला अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दोहराया

विजयराम आजाद
मूकनायक/महरौनी/ललितपुर

संविधान दिवस के अवसर पर संत शिरोमणि रविदास धर्मशाला, मंडी रोड और सोजना मोहल्ला, महरौनी (जनपद ललितपुर) में बौद्ध महासभा एवं युवाओ ने भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन, सामाजिक न्याय, महिला अधिकारों, दलितों-गरीबों के अधिकारों तथा लोकतंत्र की मजबूती पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसे बनाने में 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन लगे, कुल 6.4 लाख रुपये खर्च हुए, संविधान सभा ने 166 दिनों तक बहस की, प्रारंभिक रूप में इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियाँ थीं, जो आज बढ़कर 470+ अनुच्छेद, 12 अनुसूचियाँ और 100 से अधिक संशोधनों तक पहुँच चुकी हैं। मंच से बताया गया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान लिखने से पहले जीवनभर अपमान, बहिष्कार, जातिगत अन्याय और मनुवादी व्यवस्था के हमले सहे—महाड़ सत्याग्रह, मनुस्मृति दहन, पूना पैक्ट, दो वोट का अधिकार छिनना और शिक्षा-नौकरी में हुए अपमानों ने उन्हें ऐसे संविधान की रचना के लिए प्रेरित किया जिसमें समानता, न्याय और स्वतंत्रता राष्ट्र की मूल आत्मा हों। वक्ताओं ने बी.एन. राव को संविधान निर्माता बताने के प्रयासों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राव सलाहकार थे जबकि वास्तविक संविधान निर्माता और मुख्य शिल्पी केवल डॉ. आंबेडकर ही हैं।

कार्यक्रम में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14), लिंग के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा (अनुच्छेद 15), नौकरियों में समान अवसर (अनुच्छेद 16), मातृत्व सुरक्षा व प्रसूति अवकाश (Maternity Benefit), विवाह-संपत्ति-तलाक में समान अधिकार, शिक्षा, समान मजदूरी और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे ऐतिहासिक अधिकार प्रदान किए—जो भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण के सबसे बड़े कानूनी परिवर्तन थे, और जिनका श्रेय डॉ. आंबेडकर की प्रगतिशील सोच को जाता है। युवाओं से अपील की गई कि वे अपने घर में संविधान की प्रति रखें और उसे पढ़ें क्योंकि संविधान ही उनके अधिकारों का प्रहरी है। साथ ही यह भी बताया गया कि 26 जनवरी 1930 को डॉ. आंबेडकर ने लोकतांत्रिक भारत की प्रतिज्ञा ली थी—इसी कारण 26 जनवरी को संविधान लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

वक्ताओं ने चिंता जताई कि आज संविधान आर्थिक असमानता, सामाजिक ध्रुवीकरण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव, दलितों व महिलाओं पर बढ़ती हिंसा, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रभाव तथा संवैधानिक मूल्यों पर हमलों जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसलिए संविधान दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और कर्तव्यों को याद करने का अवसर है। कार्यक्रम में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस कथन का भी उल्लेख हुआ जिसमें उन्होंने भारतीय संविधान को “दुनिया के लिए उगता हुआ सूरज” कहा था—जो इसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को प्रमाणित करता है। समारोह इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि संविधान बाबा साहब का अमूल्य उपहार है, जिसने दलितों, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों, वंचितों और हर नागरिक को समान अधिकारों का कवच दिया है, इसलिए इसकी रक्षा, अध्ययन और पालन हर नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है।

कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति और सम्मानित अतिथियों का प्रेरक संबोधन

संत शिरोमणि रविदास धर्मशाला, मंडी रोड पर आयोजित संविधान दिवस समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त अध्यापक थोवनलाल अहिरवार ने बड़े ही सरल, समर्पित और प्रेरक अंदाज़ में की। मुख्य अतिथि के रूप में आए सेवानिवृत्त डॉ हलकरन चंचल ने संविधान के मूल्यों को पीढ़ियों तक पहुँचाने की आवश्यकता पर भावुक अपील की। विशिष्ट अतिथि सूर्यबली (प्राचार्य, शांति निकेतन इंटर कॉलेज महरौनी), अध्यापक क्षमाधर प्रसाद और प्यारेलाल छायन, डॉ धर्मदास, बबलू कुशवाहा, ननू कुशवाहा, बालमुकुंद, रामप्रकाश निरंजन, ज्ञानप्रकाश, दयाशंकर रजक, रामेश्वर प्रसाद, एड0 खिलावन सिंह आजाद, आदि ने संविधान को केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशा और संघर्षों का प्रतीक बताया।

वहीं पुराने सौजना रोड स्थित संत शिरोमणि रविदास धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जयविंद सूर्यवंशी और जितेंद्र चौधरी ने संयुक्त रूप से की। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त अध्यापक थोवनलाल अहिरवार रहे, जिन्होंने समाज में संविधानिक चेतना को बढ़ाने का संकल्प दोहराया। विशिष्ट अतिथियों में अध्यापक क्षमाधर प्रसाद, सेवानिवृत्त शालिग्राम बाबूजी, अध्यापक दामोदर प्रसाद, पूर्व पार्षद मनीष अहिरवार, तथा मूकनायक के उप-संपादक विजयराम आज़ाद आदि शामिल रहे, सबकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा दी।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीकांत गौतम ने किया। कार्यक्रम में युवाओं की ऊर्जा दिखाई दी, जहाँ अमन वाल्मीकि, देवेंद्र चौधरी, रवि अहिरवार, अभिषेक अहिरवार और सूरज कुमार आदि युवाओं ने अपने योगदान से कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। सभी की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि संविधान की रक्षा केवल नेताओं का नहीं, बल्कि हर बच्चे, हर युवा और हर नागरिक का दायित्व है।

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