भारतीय संविधान के सभी 25 भागों का विस्तृत विश्लेषण
विजयराम आजाद
मूकनायक/नई दिल्ली।
भारतीय संविधान दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक ढाँचे का आधार है। 25 भागों, 12 अनुसूचियों और 470 अनुच्छेदों वाला यह संविधान शासन की संरचना तय करने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता की भी गारंटी देता है। संविधान दिवस के अवसर पर यह समझना आवश्यक है कि भारतीय संविधान का प्रत्येक भाग किस तरह देश की लोकतांत्रिक आत्मा और विविधता को संरक्षित करता है।

भारतीय संविधान के पहले छह भाग देश की बुनियादी संरचना को परिभाषित करते हैं। भाग–1 भारत को “राज्यों का संघ” घोषित करता है और राज्यों के गठन व सीमाओं से जुड़े सभी प्रावधान तय करता है, जबकि भाग–2 नागरिकता से संबंधित नियमों को स्पष्ट करता है। भाग–3 यानी मूल अधिकार भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है, जिसमें समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता, शिक्षा के अधिकार और शोषण से मुक्ति जैसे अधिकार शामिल हैं। यही वह भाग है जिसे न्यायमूर्ति अंबेडकर ने “संविधान की आत्मा” कहा। भाग–4 नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से कल्याणकारी राज्य की दिशा तय करता है, जबकि भाग–4A नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को परिभाषित करता है।

भाग–5 और भाग–6 क्रमशः केंद्र सरकार और राज्य सरकार की संरचना को निर्धारित करते हैं—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संसद से लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभाओं तक। भाग–7 अब निरस्त हो चुका है, जबकि भाग–8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को परिभाषित करता है। इसके बाद भाग–9 और 9A ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों—पंचायत और नगरपालिकाओं—को शक्ति प्रदान करते हैं। भाग–9B सहकारी समितियों में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संचालन सुनिश्चित करता है, वहीं भाग–10 अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन की विशेष व्यवस्था तय करता है।
केंद्र–राज्य संबंध भारतीय संघीय ढाँचे की रीढ़ हैं, जिन्हें भाग–11 में विस्तृत रूप से परिभाषित किया गया है। इसके बाद भाग–12 वित्तीय अधिकारों, कराधान और समेकित कोष जैसी व्यवस्थाओं को स्पष्ट करता है। भाग–13 राज्यों के बीच व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। भाग–14 और 14A केंद्र व राज्य की सेवाओं और विभिन्न अधिकरणों की व्यवस्था प्रदान करते हैं। इसके तुरंत बाद भाग–15 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग को सौंपता है, जबकि भाग–16 SC/ST/OBC और अल्पसंख्यकों के विशेष प्रावधानों और आरक्षण को संवैधानिक सुरक्षा देता है।
राजभाषा नीति भाग–17 में निर्धारित है, जिसमें हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है और अंग्रेज़ी के प्रयोग को भी जारी रखा गया है। भाग–18 आपातकालीन प्रावधानों—राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय आपातकाल—को विस्तार से बताता है। भाग–19 उच्च न्यायालयों की संरचना, अधिकार और नियुक्तियों को परिभाषित करता है, जबकि भाग–20 संविधान संशोधन की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। भाग–21 में अस्थायी, विशेष और संक्रमणकालीन प्रावधान शामिल हैं, और भाग–22 संविधान के लागू होने तथा पुराने कानूनों के निरसन से संबंधित है। इसके अतिरिक्त, बाद के संशोधनों के तहत भाग 23, 24 और 25 के प्रावधानों को कई अनुसूचियों में समाहित किया गया है।
भारतीय संविधान केवल कानूनी नियमों का दस्तावेज़ नहीं—यह समता, आजादी, बंधुत्व और न्याय पर आधारित एक आधुनिक, वैज्ञानिक और जीवंत सामाजिक व्यवस्था का आधारस्तंभ है। दुनिया की विविध लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में इसकी संरचना अद्वितीय है क्योंकि यह भारत की भाषाई, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक विविधता को एक सूत्र में पिरोकर एक मजबूत, समानतापूर्ण और जीवंत राष्ट्र की गारंटी देता है। संविधान दिवस पर इसका अध्ययन न केवल आवश्यक है बल्कि हर नागरिक के लिए लोकतंत्र को समझने और बचाने के लिए अनिवार्य भी है।

