मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सामाजिक एकता और समरसता केवल बातों से नहीं, बल्कि मधुर संबंधों और व्यवहारिक प्रयासों से ही संभव है, क्योंकि यह प्रेम, सहयोग और समानता पर आधारित एक वास्तविक बदलाव है, ना कि केवल खोखले नारे। समाज में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव को खत्म करने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। जैसे-जैसे लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे, आपसी संबंधों को मजबूत करेंगे और समान अवसरों को बढ़ावा देंगे, तभी एक समरस और मजबूत समाज का निर्माण हो पाएगा।
सामाजिक समरसता एक सतत प्रक्रिया है जिसके लिए व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। यह केवल अच्छी बातें करने या आदर्शों की चर्चा करने से प्राप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए हमें सक्रिय रूप से मिलकर काम करना होगा, एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के हर सदस्य को गरिमा और समान अवसरों के साथ जीने का अधिकार मिले। केवल व्यावहारिक प्रयासों के माध्यम से ही हम वास्तव में एक समरस और समावेशी समाज का निर्माण कर सकते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

