





दमोह (बालाघाट) बालाघाट जिला बौद्ध संघ के तत्वाधान में गत दिवस कमला नेहरू महिला मण्डल बालाघाट में अंतर्राज्यीय युवक-युवती परिचय सम्मेलन एवं सामूहिक विवाह कार्यक्रम
भव्य और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस गरिमामय आयोजन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों से बौद्ध समाज के युवाओं और उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया।सम्मेलन में 110 से अधिक युवक-युवतियों ने मंच पर आकर अपना परिचय दिया और जीवनसाथी चुनने के लिए अपनी अपेक्षाएँ साझा कीं।यह आयोजन समाज के युवाओं को एक मंच पर लाने, वैवाहिक बंधनों को मजबूत करने और जातिभेद मिटाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने के डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के संदेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
परिचय सम्मेलन के उपरांत, पांच से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम धम्म पद्धति के अनुसार संपन्न हुआ।
नव-विवाहित जोड़ों को बुद्ध वंदना और त्रिशरण-पंचशील ग्रहण कराकर सुखी और सफल वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद दिया गया। मंचासीन अतिथियों सहित बौद्ध समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
प्रमुख अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और समरसता को बढ़ावा देते हैं तथा विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार को सादगी और कम खर्च में संपन्न करने का संदेश देते हैं। बालाघाट जिला बौद्ध संघ के जिला अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक आयुष्मान सचिन मेश्राम, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुलोचना चौहान, सुरेन्द्र गजभिये, एस.आर.रानाडे, संरक्षक जे. एस. चौरे, महासचिव एस. आर. उके, मुख्य अतिथि इंजिनियर प्रशांत भाऊ मेश्राम, धुर्वे जी, भाऊदास चौहान इत्यादि सभी पदाधिकारी व अतिथियो ने सभी युवक युवतियों एवं नव विवाहित जोड़े को मंगलमय भविष्य का आशीर्वाद देते हुए कहा गया कि “बुद्ध ने सदा प्रज्ञा (Wisdom) को महत्व दिया। विवाह केवल भौतिक सुंदरता या धन-दौलत का बंधन नहीं है। यह दो दिमागों का गठबंधन है। अपने जीवनसाथी में, आप यह देखें कि क्या उनमें सीखने की ललक है? क्या वह धम्म, समाज और देश के प्रति जागरूक है? क्या वह आपके साथ मिलकर बच्चों को बाबासाहेब के आदर्शों पर चलने की शिक्षा दे सकेंगे? यदि विचार मिलते हैं, तो जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति आपके साथ है।
“हमारा परिचय सम्मेलन एक विशिष्ट पहचान रखता है – हम बुद्धिष्ट हैं। हमारे जीवन की दिशा तथागत गौतम बुद्ध के पंचशील और अष्टमार्ग से तय होती है।
आपका जीवनसाथी ऐसा होना चाहिए जो करुणा से भरा हो, अंधश्रद्धा से मुक्त हो, और जो आपके साथ मिलकर हर सुख-दुख में समानता और मानवता के मूल्यों को कायम रखे। घर तभी आदर्श बन सकता है, जब उसके दोनों स्तंभ धम्म के सिद्धांतों पर टिके हों।”
“आज का युग बराबरी का है। विवाह में ‘वह कमाएगा और तुम संभालोगी’ की पुरानी सोच को त्यागना होगा। यह साझेदारी का रिश्ता है। जीवनसाथी ऐसा चुनें जो आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर, न केवल घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाए, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी आपका पूर्ण सहयोग करे। ‘पति-पत्नी’ नहीं, बल्कि एक ‘टीम’ बनकर रहें, जो मिलकर अपने समाज को आगे बढ़ाए।”
“प्यारे युवक-युवतियों, आज जब आप मंच पर अपना परिचय दे रहे थे, तब आपके चेहरों पर जो आत्मविश्वास और उत्साह था, वह काबिले तारीफ है।
याद रखें, जीवनसाथी की तलाश किसी शर्त या सौदेबाजी की तलाश नहीं है। यह तलाश है एक ऐसे सच्चे मित्र की, एक ऐसे सच्चे साथी की, जो आपके साथ मिलकर जीवन के हर उतार-चढ़ाव में बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाएं।
आप ऐसे संबंध स्थापित करें, जो केवल आपके व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि हमारे समूचे समाज को सशक्त, संगठित और प्रगतिशील बनाए। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन संगठन के वरिष्ठ सदस्य आयुष्मान दिलिप बागडे जी द्वारा किया गया।

