मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पिता का प्रेम और सुरक्षा की भावना एक मजबूत पेड़ की तरह होता है, जो हर तूफान में अपने बच्चों को सुरक्षित रखते हैं। उनका गुस्सा अक्सर इस डर से आता है कि बच्चा कहीं कोई ऐसी गलती ना करे जिससे उसे जीवन भर पछताना पड़े। यह चिंता तब और बढ़ जाती है, जब पिता को लगता है कि बच्चा अपने भविष्य को लेकर लापरवाही बरत रहा है। यह उस बेचैनी का रूप है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए है कि बच्चा भविष्य में किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार रहे । पिता की नाराजगी अक्सर उन मूल्यों को सिखाने की कोशिश भी होती है, जो वे अपने बच्चों में देखते हैं। यह नाराजगी अनुशासन, मेहनत, और सही-गलत की पहचान जैसे महत्वपूर्ण सबक सिखाने का एक तरीका हो सकता है ।
यह सच है कि पिता की नाराजगी अक्सर नफरत की बजाय बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेचैनी और चिंता का परिणाम होती है। जब पिता नाराज़ होते हैं, तो वे अक्सर अपनी संतान के लिए एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की कामना करते हैं, और उनकी सख्ती या नाराज़गी इसी इच्छा से उपजी होती है। यह एक प्रकार की देखभाल है, जिसे शायद गलत समझा जाता है, लेकिन इसका उद्देश्य हमेशा बच्चे की भलाई और उसके उज्जवल भविष्य के लिए सफलता सुनिश्चित करना होता है और यही उनके प्यार और सुरक्षा का एक अनूठा तरीका है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

