मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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ज़िन्दगी में दृढ़ता और लचीलापन, दोनों का अपना स्थान है। जहाँ कुछ सिद्धांतों पर अड़े रहना आवश्यक है, वहीं हर छोटी-बड़ी बात पर अपनी ज़िद पर अड़े रहना जीवन को मुश्किल बना सकता है। संतुलन बनाना ही कुंजी है। समझदारी इसी में है कि हम यह जान सकें कि कब लड़ना है और कब शांति बनाए रखने के लिए झुक जाना बेहतर है। शांतिपूर्ण और संतोषजनक जीवन जीने के लिए कभी-कभी झुकना ही सही रास्ता है।
मानव संबंध – चाहे वे पारिवारिक हों, दोस्ती के हों या पेशेवर – नाजुक होते हैं। उन्हें सहेजने के लिए लचीलेपन की आवश्यकता होती है। यदि हर व्यक्ति सिर्फ अपनी बात पर अड़ा रहेगा, तो कोई भी रिश्ता ज़्यादा दिनों तक मधुर नहीं रह सकता। ऐसे में, कभी-कभी सामने वाले की खुशी या रिश्ते की शांति के लिए अपनी बात से थोड़ा पीछे हटना, या ‘झुक जाना’, संबंधों में नई जान फूँक देता है। यह एक त्याग है, जो बदले में प्रेम और सम्मान के रूप में वापस आता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

