मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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चार दिन गायब होकर देखिए, लोग आपका नाम भूल जाएंगे” इस विचार इस बात पर केंद्रित है कि मनुष्य अक्सर यह सोचता है कि वह दूसरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आपकी गैरमौजूदगी से किसी को ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता। यह उद्धरण लोगों को इस झूठे धोखे से बाहर निकालता है और बताता है कि संबंध या महत्व अक्सर ज़रुरत पर आधारित होते हैं, जैसे कि जब एक पेड़ सूखता है तो पक्षी अपना ठिकाना बदल लेते हैं। यह विचार एक व्यावहारिक सत्य को उजागर करता है कि जीवन में आपका स्थान सापेक्ष है और आप किसी के लिए ‘ज़रूरी’ तभी तक हैं जब तक कि आपकी ज़रूरत है।
अंत में, यह विचार हमें सिखाता है कि हमें दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए और अपनी खुशियों के लिए खुद ही जिम्मेदार बनना चाहिए। आधुनिक युग में, जीवन की गति तीव्र है। हर कोई अपने दैनिक कार्यों, चिंताओं और लक्ष्यों में व्यस्त है। लोगों के पास शायद ही कभी रुकने और गहराई से सोचने का समय होता है। इस व्यस्तता के बीच, किसी व्यक्ति की अनुपस्थिति, जब तक कि वह कोई बहुत करीबी ना हो, तुरंत ध्यान में नहीं आती। लोग समाचारों, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत बातचीत में व्यस्त रहते हैं और जब कोई व्यक्ति चला जाता है या गायब हो जाता है तो दैनिक जीवन की व्यस्त दिनचर्या उसकी अनुपस्थिति को जल्दी भर देती है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

