Thursday, February 26, 2026
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समाज सुधार योद्धा मोहनलाल बारूपाल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि, बामसेफ-भारत मुक्ति मोर्चा ने याद किया उनका संघर्ष

दिलीप कुमार/ मूकनायक सिरोही। 28 अक्टूबर 2025

बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक एडवोकेट सुंदरलाल मोसलपुरिया ने बताया कि समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों के लिए जीवन-भर संघर्ष करने वाले वरिष्ठ समाजसेवी, सेवानिवृत्त विकास अधिकारी और पूर्व प्राचार्य मोहनलाल बारूपाल का निधन एक दुखद एक्सीडेंट और लंबे इलाज के बाद हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी लाखों बहुजन कार्यकर्ताओं के लिए ज्योति बनी हुई है। आज उनकी तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर, उनके जीवन के संघर्षों और समर्पण को याद करते हुए बामसेफ (अखिल भारतीय पिछड़ा और अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ) तथा भारत मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम न केवल उनकी स्मृति को जीवंत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी देता है—कि सामाजिक न्याय की लड़ाई कभी रुकनी नहीं चाहिए, भले ही राह कितनी ही कठिन क्यों न हो।मोहनलाल जी का जीवन एक जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति असाधारण परिवर्तन ला सकता है। सेवानिवृत्त विकास अधिकारी के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अनगिनत योजनाओं को जमीन पर उतारा, जबकि प्राचार्य के पद पर रहते हुए उन्होंने हजारों युवाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाया। लेकिन उनका असली जज्बा तो सामाजिक आंदोलन में झलकता था। भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में और बामसेफ के वरिष्ठ कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने बहुजन समाज के अधिकारों के लिए अथक प्रयास किया। जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की, पिछड़े वर्गों की आवाज को मजबूत किया और हमेशा कहा— “सच्ची आजादी तब मिलेगी जब समाज का हर तबका बराबरी का हकदार बने।” उनका यह संदेश आज भी प्रासंगिक है, जब समाज में असमानता की जड़ें अभी भी गहरी हैं।आज के कार्यक्रम में, जो सिरोही में आयोजित हुआ, कार्यकर्ताओं ने मोहनलाल जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सुरेश कुमार नोगिया ने कहा, “मोहनलाल जी ने साबित किया कि संघर्ष से ही परिवर्तन आता है। उनका एक्सीडेंट हमें सिखाता है कि जीवन अनिश्चित है, लेकिन समर्पण अमर रहता है।” तोलाराम फ़ाचरीया ने उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए भावुक होकर बोले, “वे एक योद्धा थे, जिन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज हम उनके सपनों को पूरा करने की कसम खाते हैं।” इसी तरह, जोगाराम सोलंकी और हिम्मताराम ने उनके नेतृत्व में किए गए आंदोलनों की कहानियां साझा कीं, जो युवाओं के बीच जोश भरने वाली थीं। पूर्णकालिक प्रचारक मदनलाल चौहान ने प्रबोधन देते हुए कहा, “मोहनलाल जी का जीवन हमें बताता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर बहुजन समाज को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।”कार्यक्रम का मंच संचालन जिला अध्यक्ष संजय नारोलिया ने कुशलतापूर्वक किया, जो पूरे समय भावनाओं को संतुलित रखते हुए सबको एकजुट महसूस कराया। अंत में, सभी कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर मोहनलाल जी के लिए शांति की प्रार्थना की। यह मौन केवल चुप्पी नहीं था, बल्कि एक संकल्प था—उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का।मोहनलाल जी का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी कहानी हमें प्रेरित करती रहेगी। वे सिखाते हैं कि असली शक्ति तन की नहीं, मन की होती है। अगर एक व्यक्ति बदलाव ला सकता है, तो हम सब मिलकर क्रांति ला सकते हैं। बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा जैसे संगठन इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे, और मोहनलाल जी की स्मृति हमें हमेशा मार्गदर्शन देगी।

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