मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर हम सुनते आए हैं कि “जो नसीब में लिखा है, वही होगा।” यह सोच हमें कर्म करने से रोकती है और हमें निष्क्रिय बनाती है। लेकिन क्या यह सच है? हमारा जीवन हमें इस बात का प्रमाण देता है कि सफलता, खुशी और समृद्धि हमें कड़ी मेहनत और सही कर्मों से मिलती है। व्यक्ति की किस्मत उसका अतीत का लेखा-जोखा है, जबकि कर्म उसके वर्तमान और भविष्य का निर्माण करता है।
कर्म और भाग्य के संबंध एक-दूसरे से गहरे से जुड़े हुए हैं। भाग्य वह है जो हमें अपने बुरे कर्मों के आधार पर मिलता है, जबकि कर्म वह है, जो हम इस जीवन में सत्कर्म करते हैं। जो बोओगे, वही काटोगे—यह कर्म का मूल सिद्धांत है। अच्छे कर्मों से अच्छा परिणाम मिलता है और बुरे कर्मों से बुरा। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि हमारा वर्तमान भाग्य हमारे पिछले कर्मों का परिणाम है, और हमारा भविष्य हमारे वर्तमान कर्मों पर निर्भर करता है।
यहां यह स्पष्ट है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है। भाग्य केवल एक अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन उस अवसर को सफलता में बदलने का काम हमारे सत्कर्म ही करते हैं। इसलिए, हमें भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। जब हम सकारात्मक विचारों और निस्वार्थ भाव से सत्कर्म करते हैं, तो हम केवल अपना ही नहीं, बल्कि दूसरों का भी भाग्य संवारते हैं। यही सत्कर्म का सच्चा और गहरा अर्थ है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

