मूकनायक/ देव भारती
हिमाचल प्रदेश
रोहडू के लिम्डा गावं में अनुसूचित जाती से सम्बंधित 12 वर्षीय बालक की जातीय आधार पर प्रताड़ना के उपरान्त जिस तरह से उस अबोध बालक ने अपनी जीवन लीला को समाप्त किया वह बेहद ही दुखद घटना है । इस घटना पर कोली समाज के पूर्व प्रदेश महासचिव एवं वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता राजेश कोश ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा की आज़ादी के 78 वर्षो के बाद भी इस तरह की घटनाओ जिसमे जाती के आधार पर प्रताड़ना करने में बच्चों तक को नहीं बक्शा जा रहा का हमारे समाज में होना ना केवल अनुसूचित समाज के लिए चिंता का विषय है अपितु इस पर समाज की सभी जाती धर्मों के लोगो को गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नज़र नहीं आता । चिंता और अधिक तब हो जाती है जब जातीय आधार पर प्रताड़ना की घटनाओं पर सामान्य जाती के अधिकतर लोग यह कहने लग जाते है की एट्रोसिटी के सभी मामले झूठे होते है जो बेहद शर्मनाक व् निंदनीय है । अधिवक्ता कोश ने कहा की उन्हें रोहड़ू क्षेत्र में सामाजिक कार्य करने का लम्बा अनुभव है और उन्हें यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की इस क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश में जातीय आधार पर छुआछूत सबसे ज्यादा देखने को मिलता है । ताज़ा घटना भी इसी चलन के परिणामस्वरूप घटित हुई है जो बेहद दुखदायी है इसलिए समाज के सभी लोगो को इस पर अपना विरोध दर्ज करना चाहिए व् भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके के लिए शासन व् प्रशासन पर पुरजोर दबाव डालकर दोषी व्यक्ति के खिलाफ अनुसूचित व् अनुसूचित जनजाति अत्यचार निवारण अधिनियम व् अन्य कानूनी प्रावधानो के अनुरूप कड़ी कार्यवाही करने की मांग करनी चाहिए ।
निसंदेह विभिन्न जाती विशेष सामाजिक संगठन इस मामले को अपने अपने स्तर पर शासन व् प्रशासन के सम्मुख उठा रहे है किन्तु यदि समाज के सभी जागरूक लोग भी ऐसी घटनाओ को उजागर करने व् पीड़ित परिवार की सहायता के लिए आगे आते है तो एक अच्छा सन्देश समाज में दिया जा सकता है ।
अधिवक्ता कोश ने कहा की उक्त मामले में फिलहाल दोषी को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम जमानत मिली हुई है क्यूंकि जिस दिन यह मामला कोर्ट के सामने आया उस वक़्त तक इसमें SC & ST Act के प्रावधानों में मामला दर्ज नहीं हुआ था और यदि इस मामले में पहले ही SC & ST Act के तहत मामला दर्ज होता तो शायद दोषी महिला को जमानत न मिलती और दोषी सलाखों के पीछे होती ।
कोश ने पुलिस प्रशासन से मांग की है की वह अगली पेशी में अपनी स्टेटस रिपोर्ट में मामले की विस्तृत रिपोर्ट माननीय अदालत के सामने पेश करे व् अदालत से दोषी महिला को मिली अंतरिम जमानत को ख़ारिज करने की गुजारिश करे और इस मामले की गंभीरता को मद्देनज़र रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करके पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का काम करे । कोश ने यह भी कहा की यदि इस मामले में कोई ढिलाई बरती गयी तो विभिन्न सामाजिक संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए भी तैयार है ।
राजेश कोश, अधिवक्ता,
पूर्व प्रदेश महासचिव व् वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष हिमाचल प्रदेश कोली समाज ।

