Thursday, February 26, 2026
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भाजपा की दलित विरोधी छवि उजागर: सिरमौर में संगठन फेरबदल से SC समाज में उबाल, ‘जयचंदों’ को मिली बड़ी जिम्मेदारी

मूकनायक /नीरज कुमार

सिरमौर/ हिमाचल प्रदेश
14 अक्टूबर 2025 विशेष संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर अपनी दलित विरोधी मानसिकता को साफ-साफ जाहिर कर दिया है। जिला सिरमौर में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल ने पार्टी की असली सूरत बेनकाब कर दी, जहां अनुसूचित जाति (एससी) समाज के खिलाफ जहर उगलने वाले और ऊंची जातियों के तलवे चाटने वाले व्यक्तियों को प्रमुख पदों पर बिठाया गया है। यह फैसला न केवल एससी समाज के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है, बल्कि भाजपा की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नौटंकी को पूरी तरह से झुठला रहा है। गिरिपार क्षेत्र के एससी लोग जब अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई सड़कों और अदालतों में लड़ रहे हैं, तब भाजपा ऐसे ‘द्रोहियों’ को बढ़ावा देकर दलितों को कुचलने की साजिश रच रही है।

गिरिपार क्षेत्र, जहां एससी समुदाय की आबादी लाखों में है, वहां के लोग लंबे समय से अपनी जमीन, अधिकार और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। लेकिन भाजपा ने इस संघर्ष को और गहरा बनाने का काम किया है। पार्टी ने शिवचंद जैसे व्यक्ति को अनुसूचित जाति रेणुका मंडल का उपाध्यक्ष बना दिया, जो इलाके में ‘जयचंद’ और विश्वासघाती के रूप में कुख्यात है। शिवचंद वह अकेला एससी व्यक्ति है जो अपने ही समाज के एक लाख से अधिक लोगों के खिलाफ जाकर राजपूतों और ब्राह्मणों (हाटियों) का खुला समर्थन करता है। सोशल मीडिया पर वह एससी लोगों के खिलाफ जहर उगलता रहा है और उनके अधिकारों को पैरों तले रौंदने में लगा रहा है। क्या भाजपा को ऐसे ‘गद्दारों’ से ही प्यार है? यह फैसला साफ बताता है कि पार्टी दलितों को सिर्फ वोट बैंक समझती है, न कि समान नागरिक।

इतना ही नहीं, सुनील गोसाई को भी महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है, जो एससी की बढ़ई जाति से संबंधित हैं, लेकिन उनके समर्थन में 50 लोग भी नहीं जुटते। गोसाई भी हाटियों के पक्ष में खड़े होकर एससी समाज के खिलाफ बोलते रहे हैं। और फिर सोशल मीडिया संयोजक की तो बात ही निराली है – यह शख्स तब से सुर्खियों में है, जब से उसने एससी संगठनों के खिलाफ अनाप-शनाप टिप्पणियां करके अपनी नफरत जाहिर की। राजेंद्र चौहान जैसे अन्य चेहरे भी इस कड़ी में शामिल हैं, जो सोशल मीडिया पर एससी लोगों को बदनाम करने और उनके संघर्ष को कमजोर करने में लगे रहे। ये सभी व्यक्ति हाटियों का खुला समर्थन करके दलितों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश कर रहे थे, और अब भाजपा ने इन्हें इनाम देकर अपनी दलित-विरोधी छवि को चमका दिया है।

इलाके के सभी अनुसूचित जाति संगठनों में इस फैसले को लेकर भारी रोष व्याप्त है। एससी समाज के नेता और कार्यकर्ता इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं। एक प्रमुख एससी संगठन के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “भाजपा ने इन ‘द्रोहियों’ को मंडल प्रमुख बनाकर साबित कर दिया कि वह दलितों की पीठ में छुरा घोंपने से नहीं चूकती। ये लोग हमारे समाज के दुश्मन हैं, और पार्टी इन्हें बढ़ावा देकर अपनी असली रंग दिखा रही है।” गिरिपार के एससी लोग, जो पहले से ही अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, अब भाजपा के इस कदम से और आक्रोशित हैं। वे कहते हैं कि पार्टी ऊंची जातियों के हितों की रक्षा कर रही है, जबकि दलितों को सिर्फ ठेंगा दिखा रही है।

यह घटना भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर दलित-विरोधी छवि की पुष्टि करती है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दलितों के विकास की बातें करते हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर पार्टी ऐसे फैसले ले रही है जो एससी समाज को अपमानित करते हैं। आगामी चुनावों में यह मुद्दा भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। एससी समाज के लोग अब इस दलित-विरोधी छवि को घर-घर पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। वे कहते हैं, “भाजपा को वोट देकर हमने गलती की, अब हम इसका जवाब देंगे।” क्या भाजपा इस आग से खुद को बचा पाएगी, या यह उसकी राजनीतिक कब्र खुदने का काम करेगी? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल सिरमौर में भाजपा की साख दांव पर लगी हुई है।

(यह लेख स्थानीय स्रोतों और एससी समाज के प्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।)

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