मूकनायक/आकाश घरडे़
बालाघाट/मध्य प्रदेश
लोकतंत्र की मजबूती केवल जनता की शक्ति या संसद के अधिकार से तय नहीं होती, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा ही उसे वास्तविक रूप से जीवित रखती है। न्यायपालिका वह स्तंभ है जिस पर संविधान की पूरी इमारत खड़ी है। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के परिसर में देश के सरन्यायाधीश पर हुआ हमला केवल एक व्यक्ति पर हुआ अपराध नहीं है, बल्कि यह संविधान, न्याय और लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा आघात है। न्याय का मंदिर कहे जाने वाले सर्वोच्च न्यायालय की पवित्रता को लांघने का यह दुस्साहस पूरे राष्ट्र के लिए चेतावनी है। यह घटना हमें यह सोचने पर विवश करती है कि यदि देश का सर्वोच्च न्यायालय और उसके प्रमुख सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक का विश्वास और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? यह हमला असल में देश की न्यायिक व्यवस्था को कमजोर करने और समाज में भय व अविश्वास फैलाने का षड्यंत्र है। आज आवश्यकता केवल निंदा की नहीं, बल्कि ठोस और निर्णायक कार्रवाई की है। इस हमले में संलिप्त व्यक्तियों को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर से कठोर दंड दिया जाना चाहिए। ऐसी सज़ा मिसाल बने, ताकि भविष्य में कोई भी न्यायपालिका की गरिमा पर हाथ उठाने का दुस्साहस न कर सके।
यह भी उतना ही आवश्यक है कि शासन और प्रशासन न्यायपालिका की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करे और उसे और अधिक सशक्त बनाए। न्यायपालिका पर हमले का अर्थ है नागरिकों के अधिकारों पर हमला। इसलिए पूरे समाज को, सभी दलों को और प्रत्येक नागरिक को इस घटना के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी।
लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब न्यायपालिका स्वतंत्र, निर्भय और सुरक्षित होकर कार्य कर सके। न्यायालय और न्यायाधीशों की गरिमा अक्षुण्ण रहनी चाहिए, क्योंकि वहीं से संविधान की आत्मा और जनता का विश्वास जीवित रहता है। सरन्यायाधीश पर हमला दरअसल न्याय और संविधान की आत्मा पर हमला है। लोकतांत्रिक भारत में इस अपराध को कभी भी सहन नहीं किया जाएगा।
हमारे मसीहा परमपूज्य डॉ बाबा साहब अम्बेडकर जो कि भारत के संविधान के मुख्य निर्माता है बाबा साहब की वजह से भारत लोकतंत्र स्थापित हुआ । बाबा साहब ने ही महिलाओं के उत्थान के लिए हिन्दू कोड बिल बनाया बाबा साहब की नीतियों से ही भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हुई।बाबा साहब की वजह से ही चुनाव आयोग का गठन हुआ। भारत में रहने वाले समस्त नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। बाबा साहब की वजह से ही जल संसाधन एवं बिजली ट्रेड की नीतियों बनाई गई ।भारत के निर्माण में डॉ बाबा साहब अम्बेडकर जी ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ऐसे भारत के सच्चे सपूत महामानव भारतरत्न डॉ भीमराव अंबेडकर का विरोध करना देश द्रोह के समान है।विगत कुछ दिनों पहले उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के अधिवक्ता.मिश्रा द्वारा डॉ बाबा साहब अम्बेडकर पर गलत एवं अभद्र टिप्पणी कर बाबा साहब का अपमान किया गया।ऐसी कुंठित मानसिकता रखने वाले पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाकर दंडात्मक कार्यवाही की मांग तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय बी आर गंवई पर जूता फेंकने का प्रयास करने वाले राकेश किशोर पर दंडात्मक कार्यवाही की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी एवं माननीय राज्यपाल महोदय जी के नाम माननीय कलेक्टर महोदय बालाघाट को दिनांक 07 अक्टूबर 2025 को समता सैनिक दल जिला शाखा बालाघाट एवं फूले अम्बेडकर जयंती समारोह समिति बालाघाट के द्वारा ज्ञापन सौंपा गया।जिसमें मुख्य रूप से समता सैनिक दल जिला शाखा बालाघाट के जिला संगठक अधिवक्ता आदर्श मेश्राम, जिला अध्यक्ष भावेश हिरकने,जिला सह कोषाध्यक्ष अभिनय लांजेवार,जिला कार्यकारिणी सदस्य सुजीत बोमार्डे,अधि.अरविंद उके,विशाल रावडे,आकाश डहाटे, अधिवक्ता कपिल डोंगरे,अशिम बोरकर, अंशुल मंडाले, अधिवक्ता राकेश मेश्राम,अंकुश कामड़े करन बोमार्डे, इत्यादि तथा फूले अम्बेडकर जयंती समारोह समिति बालाघाट के जिला अध्यक्ष अधिवक्ता दयाल वासनिक, महासचिव जुनैद खान,अमित वासनिक, अजीत वैध, हंसराज भौतिक, विशाल मेश्राम,राकेश रामटेके,दीपक जाधव एवं नितिन मेश्राम, इत्यादि समस्त अम्बेडकरी युवा उपस्थित रहे।

