मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक ऐसी यात्रा है, जिसमें हर दिन, हर पल एक नया अध्याय जोड़ता है। समय का पहिया अपनी गति से घूमता रहता है और हम आगे बढ़ते जाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, बीता हुआ समय हमारे पीछे छूट जाता है और हमारे अनुभव एक कहानी का हिस्सा बन जाते हैं। इस कहानी के अंत में, कुछ बचता है तो वह हैं हमारी यादें, जो निशानी बनकर हमेशा हमारे साथ रहती हैं। यह कथन जीवन के इस सत्य को बखूबी बयां करता है कि भले ही समय बीत जाए, लेकिन उसकी स्मृतियाँ हमेशा हमारे दिल में बसी रहती हैं। हर व्यक्ति की अपनी एक अनूठी कहानी होती है, जो बचपन की मासूमियत से लेकर जवानी के संघर्षों और बुढ़ापे की शांति तक फैली होती है।
जिंदगी के सफर में सुख-दुःख, हँसी-खुशी और सफलता-असफलता के अनेक पड़ाव आते हैं। जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि वे दिन, जो कभी हमारी हकीकत थे, अब एक मीठी या कड़वी कहानी बन चुके हैं, लेकिन, कहानी का अंत नहीं होता। समय भले ही उन पलों को मिटा देता है, परंतु यादों की निशानी हमेशा बाकी रहती है। ये यादें ही हैं, जो हमें हमारे अतीत से जोड़े रखती हैं। ये यादें कभी होंठों पर मुस्कान बनकर आती हैं, तो कभी आँखों में नमी बनकर। बचपन की शरारतें, दोस्तों के साथ बिताए गए पल, किसी खास व्यक्ति का साथ या जीवन का कोई महत्वपूर्ण फैसला—ये सभी यादें हमारे मन में एक अमिट छाप छोड़ जाती हैं। ये यादें न केवल हमारे बीते हुए समय का प्रमाण हैं, बल्कि हमारे व्यक्तित्व और अनुभव की भी निशानी हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

