मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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भारत में जाति व्यवस्था सदियों से उत्पीड़न का एक प्रमुख कारण रही है। विशेष रूप से उपेक्षित समुदाय, जो पारंपरिक जाति पदानुक्रम में सबसे नीचे हैं, उन्हें भयानक शोषण और मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना करना पड़ता है। उन्हें सामाजिक बहिष्कार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित करना और यहाँ तक कि हिंसा का शिकार होना पड़ता है । उपेक्षित समाज के लोगों में अपने अधिकारों के प्रति एकता और जागरूकता की कमी भी उन्हें शोषण का शिकार बनाती है।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देता है। हालाँकि, जब तक समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर उत्पीड़न जारी रहेगा, तब तक सच्चे मायने में एक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज की स्थापना नहीं हो सकती। उपेक्षित समाज पर हो रहे उत्पीड़न को खत्म करने के लिए सरकार, समाज और प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर काम करना होगा, तभी हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर पाएंगे, जहाँ हर नागरिक बिना किसी डर और भेदभाव के सम्मान से जी सके।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

