मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अगर जीवन में कष्ट ना हो, तो सुख और शांति के महत्व को समझना मुश्किल हो जाएगा। कष्ट एक कसौटी की तरह होता है, जो हमें अपनी असली ताकत और जीवन के मूल्यों को पहचानने में मदद करता है। कष्ट सहने पर हम दूसरों की पीड़ा को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। यह हमें अधिक संवेदनशील और दयालु बनाता है। जब हम मुश्किलों से गुज़रते हैं, तो हम अपनी छुपी हुई शक्तियों और क्षमताओं को पहचानते हैं। दुनिया में ऐसी कोई भी चीज़ पाने या करने लायक नहीं है, जिसके लिए प्रयास, पीड़ा और कठिनाई ना उठानी पड़े ।
कष्ट हमें ऐसे महत्वपूर्ण सबक सिखाता है, जो हम किताबों से नहीं सीख पाते। ये अनुभव ही हमें बुद्धिमान और समझदार बनाते हैं । कष्ट सहने से हम अधिक मजबूत और लचीले बनते हैं। यह हमें जीवन में आगे आने वाली हर मुश्किल का सामना करने के लिए तैयार करता है। जब हमें सब कुछ आसानी से मिल जाता है तो हम उसकी कद्र नहीं करते। कष्ट हमें उन छोटी-छोटी खुशियों और चीज़ों के प्रति भी आभारी बनाता है जिन्हें हम अन्यथा नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

