मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर हम दूसरों की कमियों और गलतियों पर अपनी पैनी नज़र रखते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि स्वयं हम भी कई कमियों और दोषों से घिरे हुए हैं। समाज में हर कोई खुद को दूसरों से बेहतर साबित करने की होड़ में लगा रहता है, लेकिन यह एक कड़वा सच है कि “दुनिया में दूध का धुला कोई नहीं है”। यह मुहावरा हमें यह समझने की प्रेरणा देता है कि हर इंसान में कुछ ना कुछ कमियाँ होती हैं, और यही कमियाँ हमें इंसान बनाती हैं। कमियाँ होना मानवीय स्वभाव का एक अभिन्न अंग है। अगर हर व्यक्ति परफेक्ट होता तो शायद जीवन में सीखने और आगे बढ़ने का कोई अवसर ही नहीं मिलता।
कमियाँ हमें यह सिखाती हैं कि हम गिरकर उठना सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और एक बेहतर इंसान बनने की कोशिश करें। उदाहरण के लिए, एक आलसी व्यक्ति अपनी इस कमी को पहचानकर उसे दूर करने का प्रयास करता है और इसी प्रयास से वह अपनी जीवनशैली में सुधार लाता है। दूसरों को परखने की प्रवृत्ति समाज में यह एक आम प्रवृत्ति है कि हम दूसरों को उनके बाहरी दिखावे और कुछ गलतियों के आधार पर आँकते हैं। हम भूल जाते हैं कि हर इंसान की अपनी मजबूरियाँ होती हैं। यदि हम दूसरों में सिर्फ कमियाँ देखेंगे तो हम खुद कमजोर हो जाएँगे और जब हम उनकी अच्छी बातों पर ध्यान देते हैं तो हम बेहतर इंसान बन पाते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

