Thursday, February 26, 2026
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हिमाचल प्रदेश के रोहडू में जातिवाद की भेंट चढ़ा बालक |

रोहडू में मासूम की दर्दनाक मौत, जातिगत भेदभाव बना कारण |

सुषमा पुंटा मूक नायक रोहड़ू | रोहडू क्षेत्र में घटी एक हृदयविदारक घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। जानकारी के अनुसार लगभग 12 वर्ष का एक बच्चा स्थानीय राजपूत परिवार के घर चला गया। आरोप है कि परिवार के लोगों ने उसे पकड़कर निचले कमरे में बंद कर दिया और यह कहते हुए डराया कि “तूने हमारा घर अपवित्र कर दिया है, अब शुद्धि के लिए बकरा लाना पड़ेगा।” डरे और सहमे बच्चे ने किसी तरह खिड़की से भागकर घर से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन मानसिक दबाव और भय के कारण उसने गलती से ज़हरनुमा दवा खा ली, जो सामान्यतः जानवरों को घास से बचाने के लिए प्रयोग की जाती है। इलाज से पहले ही उस मासूम ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि शव को जल्दबाज़ी में जला दिया गया और घटना की उचित सूचना न तो मीडिया में दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। इस घटना से आक्रोशित कोली समाज ने पुलिस थाने में जाकर आवाज उठाई। मृतक के पिता भी इस संघर्ष में साथ खड़े हुए। अब अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया है और परिजनों को न्याय दिलाने की उम्मीद जगी है। समाज के लोगों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की अस्मिता और मानवता का प्रश्न है। “जातिगत भेदभाव के नाम पर मासूम जानें कब तक जाती रहेंगी?” — यही सवाल अब हर तरफ गूँज रहा है। हिमांचल प्रदेश में अनुसूचित जाति समुदाय ने माँग रखी है की घटना की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जाँच हो और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी व कड़ी कार्यवाही व सज़ा होनी चाहिए | वहीं परिवार को न्याय व आर्थिक सहायता की भी मांग रखी है | साथ हीं प्रदेश में जातिगत भेदभाव और तथाकथित ‘शुद्धि’ प्रथाओं पर सख्त रोक लगे । यह घटना समाज के लिए आईना है कि आज भी जातिवाद जैसी कुरीतियाँ कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। अब ज़रूरत है कि मिलकर अन्याय के ख़िलाफ आवाज़ उठाई जाए और मासूम को न्याय दिलाया जाए।

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