मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हंसता मुस्कुराता एक ऐसा व्यक्ति है, जो हमेशा हँसता और मुस्कुराता रहता है, लेकिन यह भी ज़रूरी नहीं कि वह व्यक्ति वास्तव में खुश है, क्योंकि यह बाहरी दिखावा हो सकता है, जैसा कि “हर चमकती चीज सोना नहीं होती”, इस विचार को व्यक्त करती है कि हर बाहरी या ऊपरी चीज जो अच्छी दिखती है, वह वास्तव में वैसी ही नहीं होती, उसी प्रकार, जो व्यक्ति हंसता मुस्कुराता है, जरूरी नहीं कि वह खुश ही हो । हंसते-मुसकराते व्यक्ति के पास बैठने का, उससे बातें करने का, मित्रता साधने का, हर किसी का मन करता है। समझा जाता है कि जो अपने आप से सन्तुष्ट है, जो सफल है, जो समृद्ध है, वही व्यक्ति प्रसन्न दिखाई दे सकता है। ऐसे व्यक्ति से कुछ पाने की आशा हर किसी को होती है। जो अपनी समस्याएं हल कर चुका, वह दूसरों को भी वैसे समाधान में सहायता दें सकता है।
आज के समय में जो इंसान प्रसन्न है, वह दूसरों को प्रसन्नता दे सकता है। जो स्वयं हंसता है, वह दूसरों को भी हंसा सकता है। इन्हीं बातों के लिए हर कोई तरसता है। इसलिए प्रसन्न चित्त के प्रति आकर्षित होने और उससे सम्बद्ध रहने के लिए यदि लोगों का मन ललचाये तो इसे स्वाभाविक ही माना जाना चाहिए। कहना न होगा कि जिसके मित्र और प्रशंसक अधिक होते हैं, वह सहयोग का आदान-प्रदान करके न केवल स्वयं आगे बढ़ता, ऊंचा उठता है, वरन् दूसरों के लिए भी वैसी ही सुखद परिस्थितियां उत्पन्न करने में समर्थ रहता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

