मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सोशल मीडिया आजकल समाज का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है, लेकिन आजकल इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है। वर्तमान में सोशल मीडिया अभद्रता से इस कदर भर गया है कि यह बच्चों के मानसिक विकास के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है। सोशल मीडिया की लत अथवा गलत संगत से बच्चों में हिंसक भावनाएं बढ़ रही हैं, जो चिंताजनक है। चाहे बात टीवी की हो, फ़ेसबुक की हो या फिर इंस्टाग्राम वैगरह की हो, हर जगह दुष्प्रचार और यौन सामग्री की भरमार है और इस पर कोई खास प्रतिबंध भी नहीं लगाए जा रहे हैं। बच्चों के हिंसक व्यवहार के कई कारण हो सकते हैं और भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भी निकल सकते हैं।
बच्चों में हिंसक व्यवहार के कई संकेत हैं जिसमें गलत भाषा का प्रयोग करना, समझाने पर भी गुस्सा करना, कोई भी बात समझाने पर चीजें फैंकने लगना, मां-बाप को ही मारने दौड़ना, लोगों के बारे में गलत बोलना, गलत आदतों में पड़ऩा, भाई-बहन के लिए स्नेह न रखना, लड़ाकू प्रवृत्ति का होना, हमेशा उदास रहना, संवेदनशील और चिड़चिड़े रहना, बार-बार जोश में आना आपको नजर आ सकते हैं। एकल परिवारों में माता-पिता इतने व्यस्त होते हैं कि उनके पास बच्चों से बात करने का ज्यादा समय नहीं होता। इसलिए बच्चों को इस जंजाल से सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों की निगरानी स्वयं करें कि वे क्या कर रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि उनके लिए फ़ोन चलाने का एक उचित समय निर्धारित करें। इसके अलावा, बच्चों को जितना हो सके इंस्टा और फ़ेसबुक से दूर रखें और अपने फ़ोन पर माता-पिता का कंट्रोल नामक सुविधा को चालू करें ताकि आप यह नियंत्रित कर जान सकें कि आपका बच्चा क्या देखता है और क्या नहीं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

