मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी में कामयाबी हासिल करना माता-पिता के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक गहरा तरीका है। इसका अर्थ यह है कि आप अपने जीवन में इतना अच्छा कार्य करें कि आपके माता-पिता को भी उस पर गर्व हो और लोग उन्हें आपके उत्कृष्ट कर्मों के लिए सम्मानित करें। यह उनके द्वारा किए गए त्याग और समर्थन को पहचानना है, जिसके परिणामस्वरूप आप समाज में सम्मान पाते हैं। जीवन में सफल और सम्मानित होने के लिए अच्छे कर्म करें, ताकि आपकी उपलब्धि पर आपके माता-पिता को गर्व हो। माता-पिता निस्वार्थ भाव से अपने बच्चों का उज्जवल भविष्य बनाने में सब कुछ न्योछावर कर देते हैं और त्याग करते हैं । इसलिए उनके इस निस्वार्थ प्रेम और त्याग को पहचानना महत्वपूर्ण है ।
जिंदगी में कुछ करना है तो ऐसा करो कि लोग तुम्हें नहीं बल्कि तुम्हारे माता-पिता को प्रणाम करें” का अर्थ यह है कि आपको अपने जीवन में इतनी सफलता हासिल करनी चाहिए कि आपकी उपलब्धियों का श्रेय और सम्मान आपके माता-पिता को मिले। यह कथन इस बात पर जोर देता है कि सच्ची सफलता केवल अपनी पहचान बनाने में नहीं है, बल्कि अपने माता-पिता के त्याग और परवरिश का सम्मान करने में है। वास्तविक सफलता वह नहीं है, जहाँ केवल आप सम्मान प्राप्त करें। बल्कि वह है, जब आपकी उपलब्धियों से आपके माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा हो। लोग आपकी उपलब्धियों के लिए आपको सलाम करते हैं, लेकिन आपके माता-पिता को सलाम तब किया जाता है, जब आपका चरित्र और आपके संस्कार उन्हें गौरवान्वित करते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

