Thursday, February 26, 2026
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पूरे समर्पण से आयुष चिकित्सा पद्धति का लाभ अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचाने में जुटी डा0 मधुबाला रामटेके

मूकनायक / छत्तीसगढ़

दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद है। प्राचीन मानव सभ्यताओं में इसे भले की अलग-अलग नाम दिया गया हो, लेकिन सबके मूल में आयुर्वेद अर्थात जड़ी बूटियों से मरीजों का उपचार था और आज भी है। हजारों वर्ष से यह चिकित्सा पद्धति प्रचलित है। जब औषधालय नहीं होते थे, तब गांव-गांव में वैद्य ही प्रमुख चिकित्सक थे। यहां बस्तर में आज भी वनवासी बहुल क्षेत्रों में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति, जड़ी बूटियों पर ग्रामीणों का अटूट विश्वास है। शासन भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से उपचार के लिए लगातार सुविधाएं
जड़ी बूटी वाली दीदी बीजापुर जैसे क्षेत्र में जहां भौगोलिक विषमता और बुनियादी विकास की अपेक्षाकृत कमी है, वहां भी डा0 मधुबाला रामटेके अपनी टीम के साथ पदयात्रा करके पहुंच जाती हैं। ग्रामीण उन्हें जड़ी बूटी वाली दीदी कहते हैं। वह भी पूरे समर्पण से आयुष चिकित्सा पद्धति का लाभ अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचाने में जुटी हैं।
आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में यहां डा मधुबाला रामटेके का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। आयुष विभाग के जिला चिकित्सालय में कार्यरत डा रामटेके सप्ताह में चार दिन आयुष्मान आरोग्य केंद्र (आयुष) तुमनार में सेवाएं देती हैं। अंदरूनी क्षेत्र में सेवा देते उन्हें 23 वर्ष हो गए हैं। 2003 से वह यहां कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्र के मरीज इलाज कराने आयुष केंद्र आते हैं और आयुर्वेद चिकित्सा पर उनका विश्वास देखने लायक रहता है। कुछ अवसरों पर मरीज स्वयं ही बताने लगता है कि बीमार होने पर उसने अब तक किन-किन घरेलू नुख्शों का उपयोग किया है। डा रामटेके अंचल में बोली जाने वाली सभी स्थानीय बोलियां गोंडी, हल्बी की जानकार हैं। वह मरीजों से स्थानीय बोलियों में ही बात करती हैं। उनका कहना है कि स्थानीय बोली में मरीजों से बात करके आपसी समझ और आत्मीयता स्थापित होती है। जिसका लाभ उपचार में होता है। उनका कहना है कि बस्तर में औषधीय पेड़ पौधों की बहुतायत है। सबसे अच्छी बात है कि इनके औषधीय गुणों के जानकार भी हैं। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति ही नहीं जीवन शैली पद्धति भी है। शरीर को कैसे निरोगी बनाए रखा जा सकता है इसमें जीवन शैली का मुख्य भूमिका है। आहार में किन चीजों को शामिल करने से पौष्टिकता के साथ अधिक उर्जा मिलेगी यह वनवासी भली भांति समझते हैं। समय-समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा शिविर आयोजित कर उपचार करने के साथ ही ग्रामीणों को जीवन पद्धति की जानकारी भी दी जाती है।

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