मूकनायक/ आकाश घरडे़
बालाघाट (म.प्र)
36,240 रुपये की राशि एकत्रित कर राहत कोष में जमा करने की प्रक्रिया शुरू
बालाघाट, 17 सितंबर 2025
मानवता और सामाजिक सहयोग की मिसाल पेश करते हुए मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के ग्राम कुम्हारी के सर्वसमाज के लोगों ने पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए अपनी ओर से 36,240 रुपये की राशि एकत्रित की है। इस राशि को जिला कलेक्टर कार्यालय, बालाघाट के माध्यम से पंजाब बाढ़ राहत कोष में जमा किया जाएगा।
यह पहल इस बात का प्रतीक है कि आपदा केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र की नहीं होती, बल्कि उसका दर्द पूरे देश का दर्द होता है। जब कहीं भी प्राकृतिक आपदा आती है तो सबसे पहले समाज की सामूहिक चेतना और संवेदनशीलता ही आगे बढ़कर पीड़ितों को संबल प्रदान करती है।
ग्रामवासियों का सामूहिक संकल्प
ग्राम कुम्हारी के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि पंजाब में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए वे आर्थिक सहयोग देंगे। लोगों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान किया और कुल 36,240 रुपये की राशि इकट्ठी की। यह राशि न केवल आर्थिक सहयोग है बल्कि पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के प्रति गांववासियों की संवेदनशीलता और भाईचारे की गहरी भावना को भी दर्शाती है।
ग्राम के बुजुर्ग, महिलाएं, किसान, मजदूर और युवा—सभी ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। कुछ लोगों ने अपनी मेहनताना से बचाए पैसे दिए, तो कुछ ने अपने दैनिक खर्चों में कटौती कर सहायता राशि जमा की।
कलेक्टर से अनुमति का आग्रह
सर्वसमाज कुम्हारी की ओर से एक लिखित आवेदन जिला कलेक्टर, बालाघाट को प्रस्तुत किया गया। आवेदन में स्पष्ट किया गया कि यह राशि ग्रामवासियों द्वारा स्वेच्छा से एकत्रित की गई है, जिसे राहत कोष में जमा किया जाना है ताकि पंजाब के बाढ़ पीड़ित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह कदम केवल मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित है और ग्रामीण समाज चाहता है कि इस राशि का सदुपयोग कर बाढ़ पीड़ितों के दुखों को कुछ हद तक कम किया जा सके।
आवेदन पत्र में यह लिखा गया है कि –
“हम नीचे हस्ताक्षरकर्ता गण सर्वसमाज कुंहारी निवेदन करते हैं कि ग्राम कुम्हारी के ग्रामीणों द्वारा विगत दिनों पंजाब में आयी बाढ़ से प्रभावित पीड़ितों की सहायता हेतु हमारे द्वारा राशि 36,240 रुपये एकत्रित की गई है। हम सर्वसमाज कुम्हारी द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय बालाघाट के राहत कोष में जमा करना चाहते हैं, ताकि पंजाब बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।”
सर्वसमाज के अनेक प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह केवल कुछ लोगों का निर्णय नहीं बल्कि पूरे गांव की सामूहिक भावना का परिणाम है।
आज के समय में जब समाज में अक्सर व्यक्तिगत हित और स्वार्थ हावी रहते हैं, ऐसे में ग्राम कुम्हारी का यह कदम प्रेरणादायक है। ग्रामीणों ने यह संदेश दिया है कि मानवता सबसे ऊपर है। किसी भी व्यक्ति की जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र की पहचान से बढ़कर इंसानियत का रिश्ता होता है।
इस कदम ने यह भी सिद्ध किया है कि ग्रामीण समाज भले ही सीमित संसाधनों में जीवन यापन करता हो, लेकिन जब बात दूसरों के दुख-दर्द को बांटने की आती है तो वे पीछे नहीं रहते।
बाढ़ से पंजाब में भारी तबाही
यह सर्वविदित है कि इस वर्ष पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हो गई। इस आपदा ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया, घर-बार डूब गए, खेत और फसलें नष्ट हो गईं, और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
सरकार और सामाजिक संस्थाएँ राहत कार्यों में लगी हुई हैं, लेकिन इतनी बड़ी आपदा में प्रत्येक सहयोग महत्वपूर्ण बन जाता है। ऐसे में बालाघाट के ग्राम कुम्हारी का यह योगदान पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
समाजसेवा और लोकहित का जज़्बा
ग्राम कुम्हारी का यह कदम केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और लोकहित की भावना का परिचायक है। गांव के लोगों ने साबित किया है कि सामूहिक इच्छाशक्ति से किसी भी बड़ी समस्या का समाधान खोजा जा सकता है।
इस प्रयास ने यह भी दिखाया कि गांव की सामाजिक एकजुटता अब भी जीवित है और जब समाज के सामने किसी तरह की चुनौती आती है तो लोग मिलजुलकर उसका समाधान करने के लिए आगे बढ़ते हैं।
कुम्हारी ग्राम की यह पहल अन्य गांवों और समाजों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। अगर हर क्षेत्र और हर समाज इसी तरह आपदाग्रस्त इलाकों की मदद के लिए आगे आए, तो पीड़ितों को समय पर राहत मिल सकती है और उनका पुनर्वास भी जल्दी संभव हो सकता है।
ग्रामवासियों का यह योगदान यह भी दर्शाता है कि “थोड़ा-थोड़ा मिलकर भी बड़ा काम किया जा सकता है।” यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान करे, तो बड़ी से बड़ी आपदा का सामना करना आसान हो जाता है।
प्रशासन की भूमिका
जिला प्रशासन ने ग्राम कुम्हारी की इस पहल का स्वागत किया है। जिला कलेक्टर के पास जब यह पत्र पहुँचा तो उन्होंने ग्रामीणों के उत्साह और सहयोग की सराहना की। प्रशासनिक स्तर पर यह राशि पंजाब राहत कोष में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया को जल्द ही पूरा किया जाएगा।
कलेक्टर कार्यालय ने यह भी कहा कि ऐसी पहलें समाज में एकजुटता को मजबूत करती हैं और सरकार के प्रयासों को बल देती हैं।
बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं की झलक
यदि इस प्रयास को सामाजिक दृष्टि से देखें तो इसमें बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की शिक्षाओं की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने हमेशा कहा था कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसमें परस्पर सहयोग, समानता और भाईचारे की भावना जीवित हो।
ग्राम कुम्हारी ने उसी विचार को आत्मसात किया है और यह सिद्ध किया है कि “हम सब एक हैं, चाहे भौगोलिक दूरी कितनी भी हो।”

